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बीएचयू अस्पताल का हाल: डेढ़ साल में बिना इलाज लौटे 21 हजार दिल के रोगी, हृदय रोग विभागाध्यक्ष करेंगे आंदोलन

Fri, 07 Jul 2023 10:48 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 07 Jul 2023 10:48 PM IST
सार

बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि अस्पताल से डेढ़ साल में करीब 21 हजार दिल के रोगी बिना इलाज के लौट गए। आरोप लगाया कि एमएस से कई बार कहने के बाद भी सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के वार्ड पर भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू कराई गई।

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Condition of BHU Hospital 21 thousand heart patients returned without treatment
हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल से डेढ़ साल में करीब 21 हजार दिल के रोगी बिना इलाज के लौट गए। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में चौथे तल पर हृदय रोग विभाग के वार्ड में 41 बेड खाली होने के बाद भी एमएस प्रो.के के गुप्ता ने इस पर ताला लगा रखा है। इस वजह से मजबूरी में मरीजों को लौटाना पड़ा। यह आरोप हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में लगाते हुए एमएस पर कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही तीन माह में बेड पर ठोस फैसला न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी।

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प्रो. ओमशंकर ने आरोप लगाया कि एमएस से कई बार कहने के बाद भी सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के वार्ड पर भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू कराई गई। एमएस अब अस्पताल में हृदय रोग विभाग के 45 बेड को वापस मांग रहे हैं। ऐसा करने के बाद ही सुपरस्पेशियलिटी के 41 बेड देने को राजी है। यह गलत है।
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गलत तरीके से बनाई जा रही कमेटियां

प्रो. ओमशंकर ने एमएस पर गलत तरीके से कमेटियां बनवाए जाने का आरोप लगाया है। कहा कि रेट निर्धारण कमेटी, हॉस्पिटल अफेयर्स कमेटी, बेड एलोकेशन कमेटी, आईएमएस अफेयर्स कमेटी। 

इस तरह की कमेटियां बनवाएं जाने का कोई विश्वविद्यालय एक्ट में प्रावधान नहीं है। इस तरह की कमेटियां बनाकर अपना काम कराया जा रहा है। इसको लेकर कई पत्र कुलपति को लिखे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

विभागाध्यक्ष ने लगाए ये आरोप

  • - कायाकल्प मद में मिली धनराशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। पहले से लगे टाइल्स, मार्बल को हटवाकर फिर से टाइल्स लगवाया जा रहा है।
  • - मरीजों के लिए जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह मरीजों को नहीं मिल रही है।
  • -  पंजीकरण फीस बढ़ाने के साथ ही जांच की फीस भी बढ़ाई गई, जो गलत है।
  • - पहले से चल रहे सीसीयू लैब की जगह एक निजी कंपनी को जांच की जिम्मेदारी क्यों दी गई।
  • - अस्पताल के एमएस की मनमानी की शिकायत पर कुलपति ने भी कोई कार्रवाई की।
  • - एंजियोप्लास्टी में महंगे उपकरण मरीजों को लगाए जा रहे हैं। इसकी शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
  • - कुलपति को एमएस पर विश्वविद्यालय अधिनियम का पालन न करने के आरोप में कार्रवाई करनी चाहिए।
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