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Health News: ठंड में हार्टअटैक...सांस फूलने, सर्दी का खतरा सबसे अधिक; अस्पतालों में बनाए गए हेल्पडेस्क

Thu, 20 Nov 2025 12:08 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 20 Nov 2025 12:08 AM IST
सार

UP Weather News: ठंड में बीपी-शुगर के मरीजों का सावधान रहने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। दिन और रात में बदल रहे माैसम के साथ खुद का ध्यान रखना काफी जरूरी है।

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Cold weather poses highest risk of heart attack shortness of breath colds helpdesks set up in hospitals
मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम खांसी और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। - फोटो : freepik.com

विस्तार

Varanasi News: दिन में धूप हो रही है तो शाम होते ही ठंड लगने लग रही है। तापमान में भी दिन और रात में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। कभी औसत से दो डिग्री सेल्सियस तो कभी चार डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान हो रहा है। जिस तरह से मौसम में बदलाव हो रहा है, इसमें छोटी सी लापरवाही भी सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में हार्टअटैक, तेज बुखार, खांसी, सांस फूलने के साथ ही नसों में खून जमने की समस्या बढ़ जाती है।

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ठंड में होती हैं ये प्रमुख समस्याएं नसों में सिकुंड़न, नसों में खून जमना: आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्र कहते हैं कि ठंड आते ही बीपी बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों के शरीर में ठंड में नसों में कड़ापन होने लगता है। सामान्य अवस्थ में जब बीपी बढ़ता है तो नसों में खून का दौड़ा होता रहता है। ठंड में बीपी बढ़ने की वजह से नसों में खून जमने लगता है। नसों के फटने का खतरा रहता है। इससे लकवा की संभावना बढ़ जाती है।

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नवजात के शरीर का ज्यादा ठंडा होना
बीएचयू बाल रोग विभाग के प्रो. सुनील कुमार राव का कहना है कि ठंड में बच्चों की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें भी तीन माह तक के नवजात पर ठंड का प्रभाव अधिक रहता है। नवजात का शरीर ठंडा पड़ने से हाइपोथर्मिया की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में अभिभावकों को विशेष ध्यान देते रहना चाहिए। 10 साल तक के बच्चों में सांस फूलने, बुखार की समस्या देखने को मिल रही है। ओपीडी में भी जागरूक किया जा रहा है।

हृदयरोगियों के लिए सतर्कता वाला मौसम
ठंड आते ही हृदय रोगियों को ज्यादा सतर्कता बरतनी होती है। बीएचयू हृदय रोग विभाग के प्रो.ओमशंकर का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ ही ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है। अगर कोई पहले से हृदयरोगी है तो उसकी दवा की मात्रा भी बढ़ जाती है। बीपी, शुगर है तब भी सेहत के प्रति लापरवाही से हार्ट अटैक की संभावना भी ज्यादा बढ़ती है। उन लोगों में ज्यादा घातक होता है, जो भोर में टहलने निकलते हैं। इसी समय ठंड अधिक लगती है और हार्ट अटैक का खतरा रहता है। एकदम सुबह ठंड में नहाने से बचना चाहिए।

ठंड में होने वाली सवास्थ्य समस्याओं को लेकर अस्पतालों में हेल्पडेस्क बनाया गया है। यहां सर्दी, बुखार वाले मरीजों की अलग से सूची बनाई जा रही है। हृदय रोगियों की बढ़ती समस्या को देखते हुए सभी जगहों पर थंब्रोलाइसिस की व्यवस्था भी है। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

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