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Varanasi News: गंगा की सहायक नदी वरुणा अब नहीं होगी गंदी ! अपनाया जाएगा ये उपाय

Sun, 24 Jul 2022 03:43 PM IST
किरन रौतेला अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 24 Jul 2022 03:43 PM IST
सार

गंगा की सहायक नदी वरुणा पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम जल्द शुरू होने वाला है। जिसके लिए इजराइल की टीम के साथ चर्चा हुई है। 

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Cleaning Campaign for Ganga tributary Varuna river in varanasi
वरुणा नदी का हाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वरुणा नदी के किनारे नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इससे गंगा की सहायक नदी वरुणा में गिरने वाली गंदगी को रोका जा सकेगा। इससे नदी किनारे पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा सकेगा। इस कार्य के मद्देनजर इजराइल की टीम बनारस आकर निरीक्षण कर चुकी है।

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जल निगम के अधिकारियों से हुई चर्चा के बाद तय हुआ है कि वरुणा में गंदगी को गिरने से रोकने के लिए दोनों किनारों पर नाले बनाए जाएंगे। इसे एसटीपी से जोड़ा जाएगा ताकि एक बूंद भी गंदा पानी वरुणा में न गिरे।  इजराइल दूतावास के राजनयिक व जल विशेषज्ञ डॉ. लियोर असफ और वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञ नीरज गहलावत ने वरुणा नदी में गिरने वाले गंदगी को देखा था।
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जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि नदी में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए ड्रेनेज बाईपास बनाना होगा। इजराइल की यारकोन नदी के लिए बाईपास बनाए गए हैं। नदी में गिरने वाला गंदा पानी इस बाईपास में जाएगा। जहां पर इसे ट्रीट कर दोबारा इस्तेमाल के लिए खेतों और अन्य कामों में भेजा जाएगा। जो कि एक जगह पर आकर मिलेंगे। जब पानी पूरी तरह से साफ हो जाएगा तो यहां पर पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों की संख्या बढ़े। पहले चरण में वरुणा की गंदगी को साफ करना है। इसके बाद सुंदरीकरण का कार्य होगा। 

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छह एसटीपी से 300 एमएलडी का हो रहा शोधन 

इस समय दीनापुर, भगवानपुर, बरेका, गोइठहा, रमना, रामनगर में बने एसटीपी से सीवर का शोधन किया जा रहा है। अभी 300 एमएलडी के सीवर का शोधन हो रहा है। जबकि अब भी 350 एमएलडी सीवर निकल रहा है। 50 एमएलडी का शोधन होना बाकी है। इसे ध्यान में रखकर एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है।

मुख्यालय भेजी जाती है जांच रिपोर्ट 

प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि एसटीपी से ट्रीट होकर निकलने वाले पानी की जांच की जाती है। इसमें प्रति दस लीटर में 10 बायो केमिकल ऑक्सीसन की डिमांड होनी चाहिए। अभी 10 से अधिक बीओडी आता है। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाती है। 

जल निगम के अधिशासी अभियंता एसके रंजन ने बताया कि, वरुणा किनारे एसटीपी का निर्माण होना है। इजराइल की टीम के साथ चर्चा हुई है। वे अपनी तकनीक यहां साझा करेंगे। सफाई कार्य में उन्होंने सहयोग की बात की है। इस संबंध में शासन प्रशासन को रिपोर्ट दी गई है। 

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