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Varanasi: गुजराती, मराठी में सीख रहे संगीत, इनमें बुजुर्ग भी; अन्य प्रांतों में शास्त्रीय संगीत की बढ़ी मांग

Sat, 25 May 2024 03:36 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 25 May 2024 03:36 PM IST
सार

Varanasi News: 2012 में स्थापित शिल्पायन संस्था में अभी तक करीब तीन हजार प्रशिक्षुओं ने संगीत की साधना की है। संस्था के संस्थापक पं. देवाशीष डे ने बताया कि इसमें से 60 फीसदी प्रशिक्षु अन्य प्रांतों के हैं। उनको संगीत की बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। राग, स्वर का अभ्यास कराया जाता है।

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classical music learning in Gujarati and Marathi in varanasi
भेलूपुर स्थित शिल्पायन संस्था में गायन का अभ्यास करते प्रशिक्षु। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनारस घराने के संगीत और समृद्ध करने में नवांकुर अब हिंदी ही नहीं मराठी, गुजराती, बांग्ला सहित छह भाषाओं में बंदिशों का रियाज करेंगे। राग-रागनियों के साथ बंदिशों को इन भाषाओं में पिरोकर सुधिजनों को इसकी कर्णप्रियता का एहसास कराएंगे। अगले माह से देश भर के प्रशिक्षु इसके अभ्यास में जुट जाएंगे।

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शास्त्रीय संगीत के प्रति हर प्रांतों के लोगों में बढ़ी रुचि को देखते हुए अन्य भाषाओं में भी युवा कलाकारों को बंदिशें सिखाई जाएंगी। शिल्पायन संस्था के संस्थापक पं. देवाशीष डे ने बताया कि बनारस घराने की संगीत को दुनियाभर में पसंद किया जाता है। अन्य प्रांतों के श्रोता इसे अपनी भाषाओं में सुनने की इच्छा रखते हैं। 
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उनकी इच्छा के अनुरूप ही अगले महीने से गुजराती, मराठी, असमिया, बंग्ला, पंजाबी और राजस्थानी भाषा में युवाओं को गायन का अभ्यास कराया जाएगा। जून के पहले सप्ताह से करीब 100 बच्चों और युवाओं को रियाज कराया जाएगा। इन भाषाओं के कलाकार उन्हें ये विधा सिखाएंगे।
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पांच से 70 साल के प्रशिक्षु सीख रहे हैं संगीत
पांच साल के बच्चे से लेकर 70 साल बुजुर्ग भी संगीत सीख रहे हैं। पं. देवाशीष ने बताया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन 250 से अधिक प्रशिक्षु संस्था के जुड़े हैं। वे गायन के साथ वादन और नृत्य की विधा सीख रहे हैं। उपशास्त्रीय संगीत में होली, कजरी, चैती, भजन का अभ्यास कराया जाता है। बीएचयू में खासकर विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राएं भी संगीत सीखने आते हैं। पं. देवाशीष ने बताया कि पढ़ाई को लेकर होने वाले तनाव दूर करने के लिए आते हैं।

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