चोटीकटवा के खौफ से अब उबरने लगीं महिलाएं, अफवाहों का बाजार रहा गर्म
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करीब एक पखवारे छाया रहा चोटीकटवा का खौफ अब खत्म हो गया है। फिर भी चोटीकटवा की शिकार हुई महिलाओं और युवतियों के अलावा उनके परिवारीजन अभी भी यह जानना चाहते हैं कि कोई कीड़ा चोटी काट रहा था अथवा कुछ और।
चोटी कटने के ज्यादातर मामले ग्रामीण क्षेत्र में हुए हैं और जिनके साथ ऐसी घटनाएं होने की बात कही गई, उनकी शिक्षा का स्तर सामान्य है। यही नहीं, ज्यादातर महिलाओं और युवतियों के साथ ये घटनाएं तब हुईं, जब वे शौच के लिए बाहर जा रही थीं।
इसके चलते यह भी अफवाह उड़ाई गई कि यह सब सरकार की करामात है, ताकि लोग अपने घर में शौचालय बनवाएं। आराजी लाइन क्षेत्र के शाहंशाह पुर गांव की कलावती (35) चोटी कटने की घटना के बाद बीमार हो गई थीं। अब उनकी हालत सामान्य है।
कहती हैं कि घटना के बाद मन में खौफ बैठ गया था। रोहनिया के अखरी गांव निवासी संजू देवी और ब्यूटी पार्लर चलाने वाली सुमन की मानें तो उनकी चोटी सोते समय कट गई थी। दोनों कुछ दिन परेशान रहीं पर अब सामान्य हो गई हैं।
शौचालय बनाने के लिए सरकार की करामात की भी अफवाह खूब उड़ी
मोहनसराय जमीन बैरवन निवासी विजया, मीरापुर लठवा निवासी संतारा देवी की उत्सुकता है कि यह तो पता चले कि चोटी कैसे कटी। टडिया निवासी वंदनी देवी, भदवर निवासी किरन देवी और बढैनी की उर्मिला की अब अपनी हालत ठीक बताती हैं।
सेवापुरी क्षेत्र के कुरौना गांव निवासी उर्मिला यादव की सोते समय चोटी कट गई थी। बेलवा गांव के पुरेनंदा निवासी अकबाल की पुत्री अंगूरी की चोटी भी सोते समय कट गई थी। दोनों ही घटना के बाद बीमार हो गई थीं। उधर, चौबेपुर क्षेत्र में चोटी कटने की घटनाएं कम हुई हैं लेकिन महिलाओं के मन में दहशत अभी भी है।
किशोरियां और महिलाएं घर से निकलते समय सिर ढक रही हैं। दूसरी तरफ कैथी गांव निवासी 19 वर्षीय रेनू बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। 18 अगस्त को उसकी चोटी कट गई थी। रेनू कहता है कि किसी अनुदान या शौचालय के लिए ये घटनाएं नहीं र्हुइं हैं।
सोनबरसां गांव के राजभर बस्ती की उमा देवी इसे दैवीय प्रकोप मानकर पूजा पाठ कर रही है। 20 अगस्त को भोजन बनाते समय बर्थराखुर्द गांव में रेखा राजभर की चोटी कट गई थी। बेहोशी की हालत में सीएचसी चोलापुर में इलाज कराया गया। अब ठीक हैं। रेखा इसे किसी कीड़ा अथवा दैवीय प्रकोप मानती हैं।