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छठ महापर्व के लिए घर से लेकर घाट तक काशी तैयार
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वाराणसी। नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय षष्ठी का व्रत बुधवार से शुरू हो रहा है। श्रद्धालुओं में उल्लास का आलम यह है कि मंगलवार की शाम तक कुछ लोगों ने घाटों व सरोवरों के किनारे वेदी बनाकर अपना नाम लिखकर जगह पक्की कर ली है। वहीं कई घरों में महिलाएं कोरोना बचाव के लिए घर के छत पर कुंड तैयार कर छठ मइया की पूजा करेंगी। घरों से लेकर सड़कों तक छठ माता की आराधना के गीत गूंजने लगे हैं। बाजार में सूप और दउरी की खरीद के लिए भीड़ लगी रही। गन्ने के मंडप के बीच वेदियों पर अखंड दीप जलाकर शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ 36 घंटे के निर्जला व्रत का शनिवार समापन होगा। मंगलवार को कुंड, तालाब, गंगा और वरुणा के घाटों पर सफाई के साथ ही स्थान घेरने का काम चलता रहा।
छठ करने वाली व्रती महिलाओं में किसी ने बेटी के लिए योग्य वर मिलने तो किसी ने पति की नौकरी के लिए व्रत का संकल्प लिया है। छठ माता से घर-परिवार से लेकर नैहर, ससुराल और राष्ट्र, समाज तक के मंगल की कामना की जाएगी। व्रत को लेकर उत्साह देखते बन रहा है। व्रत में अर्घ्य देने के लिए दिल्ली, मुंबई, पटना से रिश्तेदार भी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को देर शाम तक घरों में साफ- सफाई के साथ नहाय-खाय की तैयारियां होती रहीं।
काशी के गंगा घाट और प्रमुख तीर्थ कुंडों पर होने वाले छठ महोत्सव को सीमित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देश में बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के चलते सिर्फ पूजा होगी। किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सरकार के बताए नियमों का पालन करने और शारीरिक दूरी बनाकर पूजन की अपील की है।
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20 सालों से निभा रहीं परंपरा
सूर्योपासना के व्रत से हर कामनाएं पूरी होती हैं। पुत्र, घर, सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखा जाता है। 20 सालों से पूजा करती आ रही हूं। पहली बार कोरोना काल में घर की छत पर पूरा परिवार एक साथ पूजा करेगा।- लीलावती शर्मा, मढ़ौली
परिवार की सुख समृद्धि के लिए रखती है व्रत
छठ के व्रत में सूर्य को अर्घ्य देने से आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है। यह पूजा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। कई वर्षों से मैं और मेरी बेटी साथ ही छठ पूजा करते हैं। कोरोना काल में घर में कुंड बनाकर पूजा होगी। -कमला सिंह, टकटकपुर
1991 से हर साल डाला छठ का व्रत करती आ रहीं हूं। अब तक मां से जो भी फरियाद की वह पूरी हुई है। छठ परिवार के कष्टों से दूर रखने के लिए ही होता है, इसलिए कोरोना संक्रमण काल में घर पर ही पूजा करूंगी।- मीरा श्रीवास्तव, सुंदरपुर
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छठ करने वाली व्रती महिलाओं में किसी ने बेटी के लिए योग्य वर मिलने तो किसी ने पति की नौकरी के लिए व्रत का संकल्प लिया है। छठ माता से घर-परिवार से लेकर नैहर, ससुराल और राष्ट्र, समाज तक के मंगल की कामना की जाएगी। व्रत को लेकर उत्साह देखते बन रहा है। व्रत में अर्घ्य देने के लिए दिल्ली, मुंबई, पटना से रिश्तेदार भी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को देर शाम तक घरों में साफ- सफाई के साथ नहाय-खाय की तैयारियां होती रहीं।
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काशी के गंगा घाट और प्रमुख तीर्थ कुंडों पर होने वाले छठ महोत्सव को सीमित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देश में बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के चलते सिर्फ पूजा होगी। किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सरकार के बताए नियमों का पालन करने और शारीरिक दूरी बनाकर पूजन की अपील की है।
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20 सालों से निभा रहीं परंपरा
सूर्योपासना के व्रत से हर कामनाएं पूरी होती हैं। पुत्र, घर, सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखा जाता है। 20 सालों से पूजा करती आ रही हूं। पहली बार कोरोना काल में घर की छत पर पूरा परिवार एक साथ पूजा करेगा।- लीलावती शर्मा, मढ़ौली
परिवार की सुख समृद्धि के लिए रखती है व्रत
छठ के व्रत में सूर्य को अर्घ्य देने से आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है। यह पूजा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। कई वर्षों से मैं और मेरी बेटी साथ ही छठ पूजा करते हैं। कोरोना काल में घर में कुंड बनाकर पूजा होगी। -कमला सिंह, टकटकपुर
1991 से हर साल डाला छठ का व्रत करती आ रहीं हूं। अब तक मां से जो भी फरियाद की वह पूरी हुई है। छठ परिवार के कष्टों से दूर रखने के लिए ही होता है, इसलिए कोरोना संक्रमण काल में घर पर ही पूजा करूंगी।- मीरा श्रीवास्तव, सुंदरपुर