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छठ महापर्व का आरंभ: शिव की नगरी में छाया भगवान भास्कर की उपासना का उल्लास, घरों में गूंजने लगे छठ के गीत 

Mon, 08 Nov 2021 10:51 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 08 Nov 2021 10:51 PM IST
सार

भगवान भास्कर की आराधना और लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ सोमवार से आरंभ हुआ। छठी मईया के गीतों से घर-आंगन भी गूंजने लगे हैं। घरों से लेकर घाट-कुंड और सरोवरों की रौनक देखते ही बन रही है।

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Chhath festival begins chhath songs resonate in homes
वाराणसी में लहरतारा क्षेत्र में छठ पूजा की खरीदारी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सूर्य की उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ आरंभ हो गया। घरों से लेकर घाट-कुंड और सरोवरों की रौनक देखते ही बन रही है। छठी मईया के गीतों से घर-आंगन भी गूंजने लगे हैं। भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के लिए घाट व कुंडों पर सफाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वाराणसी नगर निगम ने गंगा घाटों पर सफाई के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

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भगवान भास्कर की आराधना और लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ सोमवार से आरंभ हुआ। नहाय खाय की रस्म के लिए सबसे पहले महिलाओं ने गंगा स्नान किया। अधिकांश व्रती महिलाओं ने घरों में स्नान को प्राथमिकता दी। इसके बाद भगवान भास्कर की पूजा करके कद्दू, नया चावल और चने की दाल का भोग लगाया गया।
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इसके बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके भगवान भास्कर की आराधना के निमित्त आत्म शुद्धता का संकल्प लिया गया। छठ पूजन वाले घरों की रौनक बदली-बदली रही। कहीं सफाई हो रही थी तो कहीं पूजा की तैयारियां। गीत गवनई संग घर व खास तौर पर पूजा गृह की विधिवत सफाई की गई। घाट पर घाट छेकने और वेदी बनाने का काम भी देर शाम तक चलता रहा।  
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गंगा घाट और कुंडों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि गंगा के किनारे कई घाटों पर अभी तक सफाई का काम अधूरा है। वरुणा के तट पर भी वेदी बनाने का काम चलता रहा। वहीं शहर के कुंड, तालाब व सरोवरों पर छठ की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।


आज होगी खरना की रस्म
छठ के दूसरे दिन मंगलवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करती हैं। इसे खरना कहा जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिठ्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है।

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