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भक्त बने जगन्नाथ के सारथी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 08 Jul 2016 02:01 AM IST
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रथयात्रा मेले में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कोे उमड़े श्रद्धालु।
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भक्त और भगवान के बीच प्रेम का रिश्ता गुरुवार को सहज साकार होता दिखा। भगवान के रथ के सारथी बनने के लिए भक्त बेताब नजर आए। आसमान में छाई घटाओं और झर-झर बहती पुरवाई के सुहाने मौसम के बीच भक्तों ने भगवान का रथ खींचा। इस दौरान हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंज उठे। रंग-बिरंगी झालरों से सजे रथ की आभा निहारने के लिए काशीवासी उमड़ पड़े हैं।
काशी के लक्खी मेले रथयात्रा की रंगत गुरुवार को निखर गई। दोपहर में धूप खिलने की वजह से थोड़ी भीड़ छंटी लेकिन सांझ ढलने से पहले ही रेला उमड़ पड़ा। प्रभ जगन्नाथ के रथ के पहियों का स्पर्श करने और तुलसी की माला अर्पित करने की होड़ मच गई। महिलाओं, बच्चों में जगन्नाथ जी के दर्शन की ललक देखी गई। इसके लिए रथयात्रा चौराहे से पहले सड़क पर ही लंबी कतार लगी रही। लोग रथ की परिक्रमा करते रहे। रथयात्रा की दोनों पटरियों पर कहीं तुलसी दल लिए बच्चों की भीड़ है तो कहीं खिलौनों का अनूठा संसार सजा है। बच्चे मेले में गुब्बारों पर निशाना लगाने में जुटे थे तो महिलाएं चाट-पकौड़े के स्टालों पर। पिपिहरी के अलावा तरह-तरह के भोंपू मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
झूले, चर्खियों पर मस्ती भरे शोर देर राततक गूंजते रहे। शाम छह बजे के बाद रथयात्रा चौराहे से लेकर भगवान के रथ तक तिल रखने की जगह नहीं थी। लोग भगवान के दर्शन के लिए बढ़ते चले जा रहे थे। कोई आम तो कोई पेड़ा का भोग भगवान को लगा रहा था। करीब डेढ़ किमी एरिया में मेला फैला हुआ है। इस मेले में बनारस की खास तरह की मैदा से बनने वाली मिठाई नान-खटाई की बहार छा गई है। लोग काजू, पिस्ता, बादाम और गरी की नान खटाई रिश्तेदारों, दोस्तों के लिए भी पैक करा रहे हैं।
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काशी के लक्खी मेले रथयात्रा की रंगत गुरुवार को निखर गई। दोपहर में धूप खिलने की वजह से थोड़ी भीड़ छंटी लेकिन सांझ ढलने से पहले ही रेला उमड़ पड़ा। प्रभ जगन्नाथ के रथ के पहियों का स्पर्श करने और तुलसी की माला अर्पित करने की होड़ मच गई। महिलाओं, बच्चों में जगन्नाथ जी के दर्शन की ललक देखी गई। इसके लिए रथयात्रा चौराहे से पहले सड़क पर ही लंबी कतार लगी रही। लोग रथ की परिक्रमा करते रहे। रथयात्रा की दोनों पटरियों पर कहीं तुलसी दल लिए बच्चों की भीड़ है तो कहीं खिलौनों का अनूठा संसार सजा है। बच्चे मेले में गुब्बारों पर निशाना लगाने में जुटे थे तो महिलाएं चाट-पकौड़े के स्टालों पर। पिपिहरी के अलावा तरह-तरह के भोंपू मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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झूले, चर्खियों पर मस्ती भरे शोर देर राततक गूंजते रहे। शाम छह बजे के बाद रथयात्रा चौराहे से लेकर भगवान के रथ तक तिल रखने की जगह नहीं थी। लोग भगवान के दर्शन के लिए बढ़ते चले जा रहे थे। कोई आम तो कोई पेड़ा का भोग भगवान को लगा रहा था। करीब डेढ़ किमी एरिया में मेला फैला हुआ है। इस मेले में बनारस की खास तरह की मैदा से बनने वाली मिठाई नान-खटाई की बहार छा गई है। लोग काजू, पिस्ता, बादाम और गरी की नान खटाई रिश्तेदारों, दोस्तों के लिए भी पैक करा रहे हैं।
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