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‘इनोवेशन के लिए बदलें पढ़ाई का तरीका’
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 31 Aug 2015 02:12 AM IST
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केंद्रीय रेल राज्यमंत्री एवं बीएचयू के पुरातन छात्र मनोज सिन्हा ने विज्ञान के प्रति छात्रों में रुचि पैदा करने के लिए पढ़ाई का तौर-तरीका बदलने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इनोवेशन के लिए पढ़ाई का तरीका बदलना होगा। सिन्हा ने यह बात रविवार से बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में शुरू पांच दिवसीय इंस्पायर इंटर्नशिप साइंस कैंप के उद्घाटन समारोह में कही।
शहर के विभिन्न स्कूलों से यहां जुटे तकरीबन 500 विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम बच्चों में इनोवेशन, क्रिएटिविटी पैदा करना चाहते हैं तो हमें पढ़ाई का तरीका भी बदलना होगा। खास तौर जब बात विज्ञान और गणित जैसे विषयों की हो। अलजेबरा के फार्मूलों को इस तरह से कोडिंग करके पढ़ाया जाए जो आजीवन छात्रों के मन-मस्तिष्क में रहें। उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट में ज्यादा से ज्यादा निवेश किए जाने की भी बात कही।
स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट
अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के निदेशक डॉ. एएन राय ने कहा कि देश ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तरक्की की है लेकिन अभी बहुत कुछ करना है। हमारा देश सुपर पावर नॉलेज का केंद्र बने इसके लिए युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में नए आविष्कार, नवोन्मेषी शोध करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज भी भारत की जीडीपी का एक प्रतिशत से भी कम रिसर्च एंड डेवलपमेंट के नाम पर खर्च होता जबकि इस्राइल जैसा छोटा सा देश रिसर्च और डेवलपमेंट पर जीडीपी का पांच
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प्रतिशत खर्च करता है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण प्रतिभाओं से होता है। इसलिए जरूरी है कि प्रतिभाओं का रुझान विज्ञान की ओर हो। क्रिएटिविटी, इनोवेशन की ओर उनका ध्यान हो। कार्यक्रम संयोजक प्रो. डीसी राय ने पांच दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। स्वागत प्रो. एपी सिंह ने किया। संचालन प्रो. बेचन जायसवाल ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बच्चा सिंह ने किया।
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शहर के विभिन्न स्कूलों से यहां जुटे तकरीबन 500 विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम बच्चों में इनोवेशन, क्रिएटिविटी पैदा करना चाहते हैं तो हमें पढ़ाई का तरीका भी बदलना होगा। खास तौर जब बात विज्ञान और गणित जैसे विषयों की हो। अलजेबरा के फार्मूलों को इस तरह से कोडिंग करके पढ़ाया जाए जो आजीवन छात्रों के मन-मस्तिष्क में रहें। उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट में ज्यादा से ज्यादा निवेश किए जाने की भी बात कही।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट
अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के निदेशक डॉ. एएन राय ने कहा कि देश ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तरक्की की है लेकिन अभी बहुत कुछ करना है। हमारा देश सुपर पावर नॉलेज का केंद्र बने इसके लिए युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में नए आविष्कार, नवोन्मेषी शोध करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज भी भारत की जीडीपी का एक प्रतिशत से भी कम रिसर्च एंड डेवलपमेंट के नाम पर खर्च होता जबकि इस्राइल जैसा छोटा सा देश रिसर्च और डेवलपमेंट पर जीडीपी का पांच
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प्रतिशत खर्च करता है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण प्रतिभाओं से होता है। इसलिए जरूरी है कि प्रतिभाओं का रुझान विज्ञान की ओर हो। क्रिएटिविटी, इनोवेशन की ओर उनका ध्यान हो। कार्यक्रम संयोजक प्रो. डीसी राय ने पांच दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। स्वागत प्रो. एपी सिंह ने किया। संचालन प्रो. बेचन जायसवाल ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बच्चा सिंह ने किया।