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वाराणसी: एडवेंचर और ट्रेकिंग की श्रेणी में शामिल होगा चंद्रप्रभा अभ्यारण्य

Sat, 07 May 2022 01:42 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 07 May 2022 01:42 AM IST
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Chandraprabha Sanctuary will be included in the category of adventure and trekking
प्राकृतिक झरना (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

काशी वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत आने वाली चंदौली जिले में स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में आने वाले दिनों एडवेंचर और ट्रैकिंग के शौकीनों को सुविधा मिलेगी। इसके लिए वन विभाग की ओर से यहां ट्रेकिंग स्पॉट तैयार किया जाएगा। इसके अलावा यहां एडवेंचर का शौक रखने वालों को खूंखार जंगली जानवर, झरने, विजयगढ़ और नौगढ़ पहाड़, पेड़ पौधों के बारे में जानने को मिलेगा।

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इसके अलावा जंगल में मौजूद पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग स्पॉट को भी विकसित किया जाएगा। बीते बृहस्पतिवार को वन मंत्री ने सर्किट हाउस में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर जंगल में पर्यावरण को बढ़ाने का निर्देश दिया था। वन मंत्री ने चंद्रप्रभा अभ्यारण्य में ट्रैकिंग और एडवेंचर के लिए अधिकारियों को सर्वे कर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
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चंद्रप्रभा में ये है खास
बनारस से 68 किलोमीटर दूर चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सेंचुरी को चंद्रप्रभा के नाम से भी जाना जाता है। सेंचुरी में पिकनिक स्थल, घने जंगल, राजदरी और देवदरी जैसे प्राकृतिक झरने हैं। जिसे देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। यह सेंचुरी विजयगढ़ और नौगढ़ नाम की दो पहाड़ियों पर 9,600 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले हैं।

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कई जानवराें की प्रजातियां

इस अभयारण्य में जंगली जानवरों की कई अन्य प्रजातियां देखने को मिलती हैं। यहां पर चीतल, नीलगाय, चिंकारा, ब्लैकबक्स, खरगोश, सांभर, चौसिंह, लकड़बग्घा और भारतीय चिंकारे समेत कई तरह के जानवर देखे जाते हैं। 1958 में यहां पर तीन एशियाई शेरों को लाया गया था। 1969 में यहां पर 11 शेर हो गए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश 1970 में वे सभी गायब हो गए। वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना मई 1957 में की गई थी।

बनारस और आसपास के जिलों में मौजूद जंगलों में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से वन मंत्री ने निर्देशत किया है, जिसमें चंद्रप्रभा को ट्रेकिंग और एडवेंचर के लिए तैयार किया जाएगा। - महावीर कौजलगी, प्रभागीय वनाधिकारी
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