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पिता अन्नदाता तो बेटा परमाणु वैज्ञानिक, है न काबिलेतारीफ जोड़ी

Tue, 14 Jan 2020 04:05 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंदौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंदौली Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Tue, 14 Jan 2020 04:05 PM IST
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Chandouli's Prince became an assistant Nuclear scientist, illuminated the district
प्रिंस कुमार राय - फोटो : a

अगर लगन और मेहनत हो तो किसी भी लक्ष्य को हासिल करना नामुमकिन नहीं होता। इस बात को चंदौली जिले के बरहनी विकास खण्ड के भैंसा गांव निवासी प्रिंस कुमार राय ने साबित कर दिखाया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च सेंटर, कलपक्कम, चेन्नई में सहायक वैज्ञानिक बनकर जिले का नाम रौशन किया है।

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प्रिंस की इस सफलता पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। भैंसा गांव के रहने वाले प्रिंस राय के पिता अर्जुन राय पेशे से किसान हैं। दो भाई व एक बहन में प्रिंस दूसरे नंबर पर है। बचपन से ही पढ़ने में प्रिंस काफी होनहार रहा।
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Chandouli's Prince became an assistant Nuclear scientist, illuminated the district
न्यूक्लियर पावर प्लांट - फोटो : Social media

उन्होंने हरिद्वार राय इंटर कालेज कमालपुर से 2013 में हाईस्कूल परीक्षा 79.33 प्रतिशत अंकों में तथा वर्ष 2016 में राजकीय कालेज बिजनौर से पालीटेक्निक किया। उसके बाद वह प्रयागराज में रह कर पीसीएस की तैयारी कर रहे अपने बड़े भाई चंद्रभूषण राय के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगा।
 

Chandouli's Prince became an assistant Nuclear scientist, illuminated the district
न्यूक्लियर पावर प्लांट - फोटो : Social media

इस बीच उन्होंने देश के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी एटॉमिक रिसर्च सेंटर में परीक्षा दी। उसमें प्रिंस ने पूरे भारत में डिप्लोमा होल्डरों के लिए निर्धारित 27 सीटों में से दूसरा रैंक लाकर सफलता का परचम लहराया। इससे उसके माता-पिता के साथ साथ परिवार के हर सदस्य के चेहरे खुशी से खिल उठे है।

परिवार वालों ने बताया कि जब प्रिंस के चयन से संबंधित पत्र डाक से घर पहुंचा सभी काफी खुश हो उठे। पिता अर्जुन राय ने बताया कि प्रिंस का बचपन से ही वैज्ञानिक बनने का सपना था। बताया कि उसकी सफलता में उसके शिक्षकों का भी बड़ा योगदान है।

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