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विश्वविद्यालयों के पास नहीं छात्रों का पता, कुलाधिपति ने दिया था घर-घर डिग्री पहुंचाने का निर्देश

Thu, 04 Mar 2021 04:29 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 04 Mar 2021 04:29 PM IST
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chancellor give instructions universities to provide degree to students home but have not address
काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों के घर-घर डिग्री पहुंचाना विश्वविद्यालयों के लिए आसान नहीं होगा। कुलाधिपति के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। उत्तीर्ण हो चुके छात्रों का सही पता विश्वविद्यालय के पास नहीं होने से समस्या और गंभीर होगी। हालांकि विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वह जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकालेंगे।

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कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मंगलवार को दीक्षांत समारोह के मंच से छात्रों को घर-घर डिग्री पहुंचाने की बात कही थीं। इसके बाद से विश्वविद्यालय के अधिकारी सकते में हैं। विश्वविद्यालय के पास न तो छात्रों का पता है और न ही कोई डाटा। वर्तमान सत्र की बात करें तो विद्यापीठ ने 81612 उपाधियां तैयार की हैं। इनमें से केवल पांच सौ उपाधियों का ही वितरण किया गया है। वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 17244 उपाधियां तैयार की गई हैं और वितरण ढाई सौ का ही हुआ है।
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ऐसे में 17 हजार उपाधियां तो वैसे ही रखी हुई हैं। काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. साहबलाल मौर्य ने बताया कि विश्वविद्यालय में 2019 तक की डिग्रियां तैयार हैं। 2020 की उपाधियां भी एक महीने में बनकर तैयार हो जाएंगी। पेंडिंग उपाधियों को घर तक पहुंचाने की जहां तक बात है तो उस पर जल्द ही बैठक कर चर्चा की जाएगी। छात्रों के घर तक डिग्री पहुंचाने का काम थोड़ा मुश्किल है क्योंकि छात्रों ने जो पते दर्ज कराएं हैं, उनमें से अधिकांश पत्राचार का पता है। इस हालत में डिग्री को रजिस्टर्ड डाक से भेजने में परेशानी होगी।

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विशेश्वर प्रसाद ने बताया कि विश्वविद्यालय में 2019 तक की सभी उपाधियां महाविद्यालयों को दी जा चुकी हैं। विश्वविद्यालय में डिग्री की पेंडिंग बेहद कम है। वहीं वर्तमान सत्र की डिग्रियां तैयार हैं और जल्द ही उनका भी वितरण कर दिया जाएगा।

2013 से भटक रहे हैं डिग्री के लिए लिए
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एमजेएमसी का छात्र 2013 से भटक रहा है। छात्र ने बताया कि उसने जब डिग्री के लिए आवेदन किया तो कहा गया कि अस्थायी डिग्री ले लिजिए, अभी डिग्री तैयार नहीं है।

राजभवन की मंशा समय से मिले उपाधि
विश्वविद्यालय में प्रति वर्ष दीक्षांत समारोह करने के पीछे राजभवन की मंशा रहती है कि विद्यार्थियों को समय से उपाधियां मिल सके। वहीं दूसरी ओर दीक्षांत समारोह के दौरान काशी विद्यापीठ में विभिन्न पाठ्यक्रम के टॉप-10 विद्यार्थियों को उपाधि दी जाती है। शेष विद्यार्थियों को अस्थायी उपाधि उपलब्ध दी गई हैं।

अस्थायी प्रमाणपत्र छह माह के लिए मान्य
अस्थायी उपाधि महज छह माह के लिए मान्य होती है। छह माह बाद छात्रों को अस्थायी उपाधि के लिए फिर से आवेदन करना होता है। इतना ही नहीं इसके लिए छात्रों को प्रत्येक छह माह में शुल्क भी जमा करना पड़ रहा है। इस प्रकार छात्रों पर आर्थिक बोझ के साथ-साथ प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए बार-बार समय भी बर्बाद करना पड़ रहा है।

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