{"_id":"6a4f79f4d3edf310740f72db","slug":"challenge-to-appointment-of-next-friend-in-2019-gyanvapi-case-in-varanasi-2026-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती, 20 जुलाई को अगली सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती, 20 जुलाई को अगली सुनवाई
Thu, 09 Jul 2026 04:07 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 09 Jul 2026 04:07 PM IST
सार
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानवापी में वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित हरिहर पांडेय के विश्वास का लाभ उठाकर अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने वाद मित्र की नियुक्ति प्राप्त की।
विज्ञापन
Gyanvapi Case
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े वर्ष 1991 के सबसे पुराने वाद में वर्ष 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर बुधवार को अपर जिला जज (अष्टम) अमित कुमार तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी प्रतिवादियों को स्थानांतरण संबंधी नोटिस जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तिथि निर्धारित की।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता अनुष्का तिवारी ने अदालत में दायर रिवीजन याचिका में आरोप लगाया है कि वर्ष 2019 में मूल वाद के एकमात्र जीवित वादी पंडित हरिहर पांडेय के विश्वास का लाभ उठाकर अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने षड्यंत्रपूर्वक वाद मित्र की नियुक्ति प्राप्त की।
विज्ञापन
उनका कहना है कि नियुक्ति के बाद वाद को जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर अन्य मामलों के साथ समेकित किए जाने का विरोध किया गया। साथ ही, राज्य सरकार, केंद्र सरकार और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया गया, जिससे मुस्लिम पक्ष को लाभ मिला।
विज्ञापन