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चैत्र नवरात्र के पहले दिन विंध्य धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, चार लाख भक्तों ने शीश नवाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 18 Mar 2018 08:22 PM IST
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विंध्य धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब
- फोटो : अमर उजाला
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चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ा। कड़ी सुरक्षा के बीच करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने विंध्य धाम में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद त्रिकोण परिक्रमा कर काली खोह स्थित मां काली और अष्टभुजा पहाड़ स्थित मां अष्टभुजा के दर्शन किए।
मंदिर परिसर में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया। विंध्य धाम में दर्शन पूजन के लिए शनिवार की रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। मंगला आरती के बाद कपाट खुलते ही भक्त जयकारे के साथ आगे बढ़ने लगे। रह-रह कर श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते रहे जिससे वातावरण देवीमय हो गया। धाम की सभी गलियां श्रद्धालुओं से पटी थीं। दर्शन से पहले लोगों ने गंगा घाटों पर स्नान किया।
मंगला आरती के बाद मां के कपाट खुलते ही कतार में खड़े भक्त जयकारे के साथ आगे बढ़ने लगे। हाथों में नारियल, चुनरी एवं गुड़हल के फूलों की माला लेकर भक्त मां के अद्भुत व अलौकिक स्वरूप का दर्शन किया और नारियल, फूल तथा चुनरी चढ़ाया।
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दर्शनार्थियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। बड़ी संख्या में लोगों ने बच्चों का उपनयन व मुंडन संस्कार कराया। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर काली खोह स्थित मां काली व अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजा देवी का दर्शन पूजन किया।
इसके बाद राम गया घाट में जाकर मां तारा देवी का दर्शन कर मंगल कामना की। घर वासपी के दौरान पुरुषों व महिलाओं ने प्रसाद के रूप में चुनरी, गमछा, लाठी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी एवं बच्चों ने खिलौने आदि की खरीदारी की। विंध्य पंडा समाज और पुलिस प्रशासन के लोग सुरक्षा में लगे रहे।
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मंदिर परिसर में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया। विंध्य धाम में दर्शन पूजन के लिए शनिवार की रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। मंगला आरती के बाद कपाट खुलते ही भक्त जयकारे के साथ आगे बढ़ने लगे। रह-रह कर श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते रहे जिससे वातावरण देवीमय हो गया। धाम की सभी गलियां श्रद्धालुओं से पटी थीं। दर्शन से पहले लोगों ने गंगा घाटों पर स्नान किया।
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मंगला आरती के बाद मां के कपाट खुलते ही कतार में खड़े भक्त जयकारे के साथ आगे बढ़ने लगे। हाथों में नारियल, चुनरी एवं गुड़हल के फूलों की माला लेकर भक्त मां के अद्भुत व अलौकिक स्वरूप का दर्शन किया और नारियल, फूल तथा चुनरी चढ़ाया।
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दर्शनार्थियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। बड़ी संख्या में लोगों ने बच्चों का उपनयन व मुंडन संस्कार कराया। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर काली खोह स्थित मां काली व अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजा देवी का दर्शन पूजन किया।
इसके बाद राम गया घाट में जाकर मां तारा देवी का दर्शन कर मंगल कामना की। घर वासपी के दौरान पुरुषों व महिलाओं ने प्रसाद के रूप में चुनरी, गमछा, लाठी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी एवं बच्चों ने खिलौने आदि की खरीदारी की। विंध्य पंडा समाज और पुलिस प्रशासन के लोग सुरक्षा में लगे रहे।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं विंध्य धरा
चैती महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
नव संवत्सर के आगमन पर मिर्जापुर के पक्काघाट पर चैती महोत्सव का आयोजन शनिवार की शाम किया गया। इसका उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनका संसदीय क्षेत्र और विंध्य धरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत में बीएचयू की प्रोफेसर मधुमिता भट्टाचार्य ने लागे न जियरा हमार रे, मोरे सैंया गए परदेश... सुनाकर लोगों को मुग्ध कर दिया।
इस दौरान विधायक सुचिस्मिता मौर्य ने कहा कि जिले की सुंदर कला और उद्योग को संरक्षित रखने के लिए हम सब को मिलकर कार्य करने की जरूरत हैं। कजली गायिका अजिता श्रीवास्तव ने मैं तो कान्हा संग होरी खेलूंगी.. सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध किया।
आकाशवाणी के कलाकार राम जनम भारती ने होली गीतों की प्रस्तुति की। बाल कलाकार सारस्वत सिंह ने शिव तांडव पर नृत्य कर वाहवाही लूटी। गंगा नदी में नाव पर बने मंच पर कलाकारों ने देर रात तक लोगों का मनोरंजन किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनका संसदीय क्षेत्र और विंध्य धरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत में बीएचयू की प्रोफेसर मधुमिता भट्टाचार्य ने लागे न जियरा हमार रे, मोरे सैंया गए परदेश... सुनाकर लोगों को मुग्ध कर दिया।
इस दौरान विधायक सुचिस्मिता मौर्य ने कहा कि जिले की सुंदर कला और उद्योग को संरक्षित रखने के लिए हम सब को मिलकर कार्य करने की जरूरत हैं। कजली गायिका अजिता श्रीवास्तव ने मैं तो कान्हा संग होरी खेलूंगी.. सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध किया।
आकाशवाणी के कलाकार राम जनम भारती ने होली गीतों की प्रस्तुति की। बाल कलाकार सारस्वत सिंह ने शिव तांडव पर नृत्य कर वाहवाही लूटी। गंगा नदी में नाव पर बने मंच पर कलाकारों ने देर रात तक लोगों का मनोरंजन किया।