मिर्जापुर: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा का आदेश, एनडीपीएस एक्ट के दर्ज फर्जी केस में फैसला
अधिकारियों व गिरफ्तार करने वाली टीम पर मुकदमा दर्ज करने, पीड़ित को मुआवजा दिलाने और एक माह में विभागीय कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के लिए भी कहा है।
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एनडीपीएस गाड़ी मालिक पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर फंसाए जाने के मामले में मिर्जापुर में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम वायुनंदन मिश्र की अदालत ने आदेश जारी किया है। आदेश में गिरफ्तार करने वाली कोतवाली पुलिस और मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कार्रवाई करने को कहा है। अधिकारियों व गिरफ्तार करने वाली टीम पर मुकदमा दर्ज करने, पीड़ित को मुआवजा दिलाने और एक माह में विभागीय कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के लिए भी कहा है। यह आदेश 10 अगस्त का है।
देहात कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपियों को गांजा और कार के साथ तीन फरवरी 2021 को गिरफ्तार किया था। इस मामले में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। चार माह बाद कार मालिक रामकरन पटेल निवासी बोर्रा, थाना रानीगंज, जिला प्रतापगढ़ को गिरफ्तार आरोपियों के अवैध कारोबार से लाभ अर्जित करने का संभावित दोषी मानते हुए बिना किसी नए साक्ष्य के आरोपियों में शामिल कर लिया गया। रामकरन पटेल को अभियुक्त बनाने, गिरफ्तारी, उसके विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित करने के बीच पुलिस अधिकारियों की कई कार्यवाही ने न्यायालय को भ्रमित किया था।
इस पर न्यायालय ने मामले की दोबारा जांच कराई। रामकरन के अधिवक्ता विनोद कुमार मिश्रा ने प्रार्थना पत्र देकर बताया कि न्यायालय के आदेश पर वह गाड़ी रिलीज कराने गए तो कोतवाल ने आदेश मानने से इनकार कर दिया। पैसे की मांग की गई। हालांकि गाड़ी रिलीज कर दी गई, पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। न्यायालय ने पाया कि पुलिस विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी ने संवेदनशील मामले में संवेदनहीनता दिखाई है।
अधिकारियों की कार्रवाई संदिग्ध पाई गई। एफटीसी प्रथम वायुनंदन मिश्र ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि गिरफ्तार करने वाली देहात कोतवाली की टीम, मामले की जांच में संवेदनहीनता बरतने वाले अधिकारी पर मुकदमा दर्ज कराया जाए। मुआवजे की धनराशि पुलिसकर्मियों के वेतन से देकर एक माह में विभागीय कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराया जाए।
छोटे अपराध को बड़ा कर निर्दोष को न फंसाएं
अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी प्रथम वायु नंदन मिश्र ने प्रमुख सचिव गृह/अपर मुख्य सचिव गृह उत्तर प्रदेश सरकार को भी निर्देश दिया कि वे ध्यान दें कि छोटे अपराध को बड़ा बना कर निर्दोष को न फंसाएं।
जानें पूरा मामला, क्या हुई थी कार्रवाई
तीन फरवरी 2021 को मिर्जापुर की करनपुर पहाड़ी से सफेद रंग की कार ड्रमंडगंज से आ रही थी। पुलिस ने करनपुर पहाड़ी से कार में गांजे के साथ विक्रम सिंह सोनी, राकेश सिंह यादव, अमित पटेल को गिरफ्तार किया था। 12 फरवरी 2021 को मामले में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया गया। मामले में पुलिस ने कार मालिक रामकरन पटेल को चौथे आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लिया।
रामकरन पटेल के अधिवक्ता विनोद कुमार मिश्र ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि चार जून 2021 की दोपहर न्यायालय के आदेश पर कार को रिलीज कराने देहात कोतवाली गए। लेकिन, कोतवाल ने कहा कि वह न्यायालय के आदेश को नहीं मानते, एसपी का आदेश है। पहले रामकरन का बयान होगा, उसके बाद वाहन रिलीज होगा। इस दौरान 20 हजार रुपये की मांग की गई। पैसा देने से मना करने पर धमकी देते हुए गाड़ी रिलीज की गई। 16 जून 2021 को पुलिस रामकरन पटेल को जिला प्रतापगढ़ से लेकर मिर्जापुर आई और 18 जून 2021 को फर्जी कहानी दिखाकर निरुद्ध कर दिया। 15 दिन बाद गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमे में भी चालन कर दिया। इस संदर्भ में एडीजी जोन बृजभूषण ने बताया कि मामले में लोकल अधिकारी ही कुछ बता पाएंगे। मुझे जानकारी नहीं है।