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312 रुपये की मामूली चूक के लिए 41 साल लगाए कोर्ट के चक्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 11 Sep 2018 10:00 AM IST
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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अदालत में मामूली लिपिकीय गलती से कुर्की के मामले में कोर्ट फीस जमा करने के बाद भी एक महिला को 41 वर्ष तक अदालत के चक्कर लगाने पड़े।
मामले में 31 अगस्त को सीनियर डिविजन जज लवली जायसवाल ने गलती पकड़ी और त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का निस्तारण किया।
शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी गंगा देवी के परिवार के मुताबिक उनके मकान को वर्ष1975 में किसी कारणवश डीएम के निर्देश पर सदर तहसीलदार ने कुर्क कर दिया था।
प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ गंगा देवी ने सिविल जज (सीनियर डिविजन) की अदालत में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने 1977 में वादिनी को 312 रुपये कोर्ट फीस जमा करने का आदेश दिया था।
इसके बाद गंगा देवी ने फीस जमा कर दी थी। फिर अदालत ने गंगा देवी के पक्ष में इस मुकदमे का निस्तारण भी कर दिया। अदालत के इस फैसले के विरोध में राज्य सरकार ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
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मामले में 31 अगस्त को सीनियर डिविजन जज लवली जायसवाल ने गलती पकड़ी और त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का निस्तारण किया।
शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी गंगा देवी के परिवार के मुताबिक उनके मकान को वर्ष1975 में किसी कारणवश डीएम के निर्देश पर सदर तहसीलदार ने कुर्क कर दिया था।
प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ गंगा देवी ने सिविल जज (सीनियर डिविजन) की अदालत में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने 1977 में वादिनी को 312 रुपये कोर्ट फीस जमा करने का आदेश दिया था।
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इसके बाद गंगा देवी ने फीस जमा कर दी थी। फिर अदालत ने गंगा देवी के पक्ष में इस मुकदमे का निस्तारण भी कर दिया। अदालत के इस फैसले के विरोध में राज्य सरकार ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
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यहां सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश ने सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। बावजूद इसके लिपिकीय गलती के कारण कोर्ट फीस जमा होने का जिक्र अदालती कार्यवाही में नहीं किए जाने के कारण मामला 41 वर्षों तक अदालत में चलता रहा।
मुकदमे की पैरवी करते गंगा देवी भी बुजुर्ग हो गई। मामले में जब सिविल जज लवली जायसवाल ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए पत्रावली का अध्ययन किया तो गलती पकड़ में आई। उन्होंने 31 अगस्त 2018 को मामले का निस्तारण करते हुए गंगा देवी को राहत दिलाई।
मुकदमे की पैरवी करते गंगा देवी भी बुजुर्ग हो गई। मामले में जब सिविल जज लवली जायसवाल ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए पत्रावली का अध्ययन किया तो गलती पकड़ में आई। उन्होंने 31 अगस्त 2018 को मामले का निस्तारण करते हुए गंगा देवी को राहत दिलाई।