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खुलासाः बीएचयू में आधे-अधूरे प्रमाणपत्रों पर ही मिल गई नौकरी

Wed, 04 Apr 2018 10:46 AM IST
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 04 Apr 2018 10:46 AM IST
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Candidate got job on incomplete certificates in BHU
बीएचयू अस्पताल
बीएचयू में जरूरी प्रमाणपत्रों के बगैर ही शिक्षकों की नियुक्ति का नया मामला सामने आया है। संबंधित पदों के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता के प्रमाणपत्र आवेदन के साथ नहीं लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे मामलों की जानकारी खुद दी है।
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एक आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई इन नियुक्तियों में कुछ आवेदक ऐसे भी हैं, जिन्हें आधी-अधूरी अर्हताओं पर ही नियुक्त कर दिया गया है।
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25 जनवरी, 18 को आरटीआई के माध्यम से विश्वविद्यालय के भू-भौमिकी विभाग में नियुक्त शिक्षकों की पीएचडी से जुड़े अभिलेखों की मांग की थी। इसमें उन्होंने संबंधित अभ्यर्थी के यूजीसी नेट या पीएचडी होने की जानकारी मांगी थी।
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16 फरवरी को कुलसचिव कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब और कागजातों में लिखा है कि आवेदकों ने खुद को नेट क्वालीफाई न होना बताया है लेकिन यूजीसी के 2009 के रेग्युलेशन का हवाला देते हुए पीएचडी डिग्रीधारक बताया है। 

विश्वविद्यालय का कोई सरोकार नहीं

Candidate got job on incomplete certificates in BHU
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मौजूदा नियमों के अनुसार अगर कोई आवेदक नेट क्वालीफाई नहीं है तो छह महीने के पीएचडी कोर्स वर्क के आधार पर शिक्षक बनाया जा सकता है। आरटीआई में विभाग में आवेदन करने वालों की पीएचडी कोर्स वर्क प्रमाणपत्र की जानकारी मांगी गई थी।

विश्वविद्यालय ने इस प्रमाणपत्र के न होने की जानकारी दी है। इसके अलावा दो मामलों में यूजी-पीजी के सर्टिफिकेट मांगे गए थे, विश्वविद्यालय ने इसके भी न होने की सूचना दी है। सूत्रों की मानें तो ऐसे करीब डेढ़ दर्जन से अधिक मामले कुछ और संकायों और उनके विभागों में भी हैं। विज्ञान संकाय में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है।

बीएचयू के कुलसचिव का कहना है कि आरटीआई का जवाब नियमानुसार दिया जाता है। इसके लिए संबंधित अधिकारी और विभागों की ओर से जो भी जानकारियां मिलती हैं, उसे आवेदक को दे दिया जाता है। जानकारी का कहां और क्या असर पड़ेगा, इससे विश्वविद्यालय का कोई सरोकार नहीं होता है।
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