सीए फाइनल की परीक्षा: काशी की तीन बेटियों ने लहराया परचम, नौकरी और दिन-रात मेहनत कर पाया मुकाम; खुशी का माहौल
सीए फाइनल परीक्षा में काशी की तीन बेटियों—दृष्टि प्रद्धवानी, कावेरी झा और वर्तिका अग्रवाल ने शानदार सफलता हासिल कर शहर का गौरव बढ़ाया है। किसी ने नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी तो किसी ने दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम पाया। उनकी उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा और मेहनत की मिसाल बनी है।
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काशी की तीन प्रतिभाशाली बेटियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) फाइनल परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शहर का नाम रोशन किया है। कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि से परिवारों के साथ-साथ पूरे शहर में खुशी का माहौल है।
इन सफल छात्राओं में दृष्टि प्रद्धवानी, कावेरी झा और वर्तिका अग्रवाल शामिल हैं। तीनों ने अपने-अपने स्तर पर चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की और युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
दृष्टि प्रद्धवानी जिले के वरिष्ठ सीए जय प्रद्धवानी की पुत्री हैं। उन्होंने आईसीएआई नई दिल्ली द्वारा घोषित सीए फाइनल परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त कर चार्टर्ड अकाउंटेंट की डिग्री हासिल की। दृष्टि ने अपनी सीए ट्रेनिंग मुंबई और वाराणसी में पूरी की। उन्होंने बताया कि भविष्य में वह एमबीए (फाइनेंस) की पढ़ाई कर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने का प्रयास करेंगी।
वहीं, बीएचयू की पूर्व छात्रा कावेरी झा ने भी सीए फाइनल परीक्षा में सफलता अर्जित की है। मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले की रहने वाली कावेरी ने वर्ष 2022 में बीएचयू से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह अपने परिवार के साथ जयपुर में रहकर सीए की तैयारी कर रही थीं। तैयारी के दौरान उन्होंने निजी क्षेत्र में नौकरी भी की और पढ़ाई के साथ संतुलन बनाते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया।
इसी क्रम में वर्तिका अग्रवाल ने भी सीए फाइनल परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पिता भूपेंद्र अग्रवाल ने इसे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि वर्तिका के बड़े भाई भी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और अब परिवार के दोनों बच्चों का इस प्रतिष्ठित पेशे में होना अत्यंत खुशी की बात है।
वर्तिका ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और लगातार किए गए कठिन परिश्रम को दिया। तीनों बेटियों की सफलता ने काशी के युवाओं को नई प्रेरणा दी है।