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संडे तक कैश का ‘नो टेंशन’
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 21 Dec 2016 01:34 AM IST
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नए नोट
- फोटो : ani
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नोटबंदी के बाद से नकदी संकट झेल रहे लोगों के लिए शुक्रवार देर रात मिली नई करेंसी से बड़ी राहत मिली है। इसके बाद शहर और ग्रामीण इलाकों में बैंकों-एटीएम पर लाइन खत्म हो गई है। जहां पहले लोगों को घंटो इंतजार के बाद भी निराश लौटना पड़ रहा था वहीं अब जरूरत के हिसाब से रुपये मिल रहे हैं। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 22 दिसंबर के आगमन को मुख्य वजह मानी जा रही है। माना जा रहा है कि पीएम के आगमन को देखते हुए आरबीआई ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों के मुताबिक 25 दिसंबर तक फिलहाल कोई बड़ी समस्या नहीं होने वाली है।
आठ नवंबर को 500-1000 के पुराने नोटों का चलन बंद होने के बाद करीब एक महीने तक हर दिन बैंकों-एटीएम पर नोट के लिए लंबी लाइन दिखी। कई जगहों पर तो लोगों को घंटों खड़े होने के बाद भी रुपये नहीं मिल पा रहे थे। इस बीच 16 दिसंबर की देर रात आई 2700 करोड़ की नई करेंसी के बाद राहत मिली है। आरबीआई के इस कदम का असर भी अगले दिन से ही दिखने लगा है। जिन बैंकों-एटीएम पर लोगों को मारामारी करनी पड़ती थी वहां हालत सामान्य दिख रहे थे। यहीं नहीं बहुत से ऐसे एटीएम भी चल रहे हैं जो कैश की कमी की वजह से बंद पडे़ थे। सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान नोटबंदी से जुड़ी समस्या पर कोई आवाज न उठे और पीएम के पास अच्छा संदेश जाए, इसको देखते हुए ही आरबीआई ने एक मुश्त बड़ी धनराशि भेजी है। हालांकि इसमें भी अधिकांश नोट 2000 के ही हैं, ऐसे में 500 के नोट न आने से लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई है।
नोट बंदी पर सरकार की ओर से लिए जा रहे हर दिन अलग-अलग फैसले अब लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। पहले नोट बदलने, खाते में जमा करने के नियमों में बदलाव के बाद अब लोग 30 दिसंबर तक 5 हजार से अधिक एक बार जमा करने के फैसले से परेशान है। मंगलवार को बैंकों में इसको लेकर ग्राहकों-कर्मचारियों में नोंकझोंक हुई। इस वजह से बैंकों में कामकाज भी प्रभावित रहा। मंगलवार को शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों के बैंकों-डाकघरों में रोजाना की तरह कोई दस हजार तो कोई उससे अधिक के नोट लेकर जमा कराने पहुंचा। यहां कर्मचारियों ने जब पांच हजार से अधिक जमा न करने की बात कही तो लोग नाराज हो गए। नई सड़क स्थित बांबे मर्कटाइल कोआपरेटिव बैंक सहित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की ग्रामीण शाखाओं पर इसको लेकर नोंकझोंक भी हुई। बाद में अधिकारियों ने किसी तरह समझाया तब जाकर लोग शांत हुए।
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आठ नवंबर को 500-1000 के पुराने नोटों का चलन बंद होने के बाद करीब एक महीने तक हर दिन बैंकों-एटीएम पर नोट के लिए लंबी लाइन दिखी। कई जगहों पर तो लोगों को घंटों खड़े होने के बाद भी रुपये नहीं मिल पा रहे थे। इस बीच 16 दिसंबर की देर रात आई 2700 करोड़ की नई करेंसी के बाद राहत मिली है। आरबीआई के इस कदम का असर भी अगले दिन से ही दिखने लगा है। जिन बैंकों-एटीएम पर लोगों को मारामारी करनी पड़ती थी वहां हालत सामान्य दिख रहे थे। यहीं नहीं बहुत से ऐसे एटीएम भी चल रहे हैं जो कैश की कमी की वजह से बंद पडे़ थे। सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान नोटबंदी से जुड़ी समस्या पर कोई आवाज न उठे और पीएम के पास अच्छा संदेश जाए, इसको देखते हुए ही आरबीआई ने एक मुश्त बड़ी धनराशि भेजी है। हालांकि इसमें भी अधिकांश नोट 2000 के ही हैं, ऐसे में 500 के नोट न आने से लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई है।
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नोट बंदी पर सरकार की ओर से लिए जा रहे हर दिन अलग-अलग फैसले अब लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। पहले नोट बदलने, खाते में जमा करने के नियमों में बदलाव के बाद अब लोग 30 दिसंबर तक 5 हजार से अधिक एक बार जमा करने के फैसले से परेशान है। मंगलवार को बैंकों में इसको लेकर ग्राहकों-कर्मचारियों में नोंकझोंक हुई। इस वजह से बैंकों में कामकाज भी प्रभावित रहा। मंगलवार को शहर के साथ ही ग्रामीण इलाकों के बैंकों-डाकघरों में रोजाना की तरह कोई दस हजार तो कोई उससे अधिक के नोट लेकर जमा कराने पहुंचा। यहां कर्मचारियों ने जब पांच हजार से अधिक जमा न करने की बात कही तो लोग नाराज हो गए। नई सड़क स्थित बांबे मर्कटाइल कोआपरेटिव बैंक सहित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की ग्रामीण शाखाओं पर इसको लेकर नोंकझोंक भी हुई। बाद में अधिकारियों ने किसी तरह समझाया तब जाकर लोग शांत हुए।
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