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Varanasi News: छिपाने से बढ़ता है, बताने से घटता है साधना और संकल्प
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। कालरात्रि पीठाधीश्वर अखिलदास महाराज ने कहा कि मोह-माया व लोभ से बचकर हमें विलासिताओं से दूर रहकर ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। जब तक प्रभु के श्रीचरणों की भक्ति में लीन नहीं होगे उनका दर्शन मुश्किल है। भगवान तर्क का विषय नहीं, समर्पण का विषय हैं। प्रभु की कभी परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। जीवन में भक्ति के साथ विवेक बहुत जरूरी है।
वह शनिवार को मां चंडिका देवी मंदिर परिसर, सुसुवाही में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन प्रवचन कर रहे थे। अखिलदास महाराज ने कहा कि साधना और संकल्प को गुप्त रखना चाहिए। यह छिपाने से बढ़ता है, बताने से घटता है। सत्संग को बताने से जो पुण्य मिलता है। विपत्ति तब आती है, जब सुमिरन भजन नहीं होता। वह चिंतन ही क्या जो भगवान से न मिला दे। आरती के उपरांत भक्तजनों को प्रसाद का वितरण किया गया।
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वाराणसी। कालरात्रि पीठाधीश्वर अखिलदास महाराज ने कहा कि मोह-माया व लोभ से बचकर हमें विलासिताओं से दूर रहकर ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। जब तक प्रभु के श्रीचरणों की भक्ति में लीन नहीं होगे उनका दर्शन मुश्किल है। भगवान तर्क का विषय नहीं, समर्पण का विषय हैं। प्रभु की कभी परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। जीवन में भक्ति के साथ विवेक बहुत जरूरी है।
वह शनिवार को मां चंडिका देवी मंदिर परिसर, सुसुवाही में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन प्रवचन कर रहे थे। अखिलदास महाराज ने कहा कि साधना और संकल्प को गुप्त रखना चाहिए। यह छिपाने से बढ़ता है, बताने से घटता है। सत्संग को बताने से जो पुण्य मिलता है। विपत्ति तब आती है, जब सुमिरन भजन नहीं होता। वह चिंतन ही क्या जो भगवान से न मिला दे। आरती के उपरांत भक्तजनों को प्रसाद का वितरण किया गया।
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