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समृद्धि संवाद: कारोबारी और व्यापारियों ने बताया ‘आशियाने का सपना’ पूरा करने का यही सही वक्त

Tue, 24 Sep 2019 09:20 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 24 Sep 2019 09:20 PM IST
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Businessman on on rera samridhi sanvad program organized in amar ujala office varanasi
समृद्धि संवाद में मौजूद कारोबारी और व्यापारी। - फोटो : अमर उजाला
नोएडा, गाजियाबाद को छोड़ दिया जाए तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में रियल इस्टेट के ज्यादातर प्रोजेक्ट ईमानदारी से पूरे हुए। रेरा आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए इस सेक्टर में निवेश और भी सुरक्षित हो गया है। ऐसे में ‘आशियाने का सपना’ पूरा करने का यह सही वक्त है। यही नहीं निवेश के लिए भी रियल इस्टेट सबसे ज्यादा उपयुक्त है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच बेहतर सामंजस्य इस सेक्टर में बूम ला सकता है।
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आगामी त्योहारी सीजन में रियल इस्टेट सेक्टर में छाई सुस्ती दूर होने की उम्मीद है। यह विचार अमर उजाला की ओर से मंगलवार को चांदपुर स्थित कार्यालय में समृद्धि संवाद के दौरान निकल कर आई। इसमें रियल इस्टेट से जुड़े कारोबारी व फर्नीचर व्यापारियों ने हिस्सा लिया।
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वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक सबको आवास देने का सपना देखा है। ऐसे में अफोर्डेबल हाउसिंग पर कारोबारियों का पूरा फोकस है। शासन, प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। वहीं कुछ नियम कानून को भी अव्यवहारिक बताया। इसे दूर करने की एक बार फिर मांग उठी। इस दौरान सभी ने एक मत से स्वीकार किया कि बाजार में मंदी नहीं बल्कि उसका वहम फैला दिया गया है।
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खास बातें-
  • जीएसटी के स्लैब में लाई जाए कमी
  • रेरा के नियमों को बनाया जाए व्यावहारिक
  • सर्किल रेट और मार्केट रेट में हो समानता
  • केंद्र व राज्य सरकार के बीच नियमों को लेकर बने सामंजस्य
  • बिल्डिंग मैटेरियल सस्ते हों
  • सिंगल विंडो सिस्टम को बनाया जाए व्यावहारिक, एनओसी की अड़चनाें को किया जाए दूर
  • अलग-अलग क्षेत्र के लिए बने जोनल प्लान

रियल इस्टेट कारोबार को भी इंडस्ट्री का दर्जा मिले और इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट सहित अन्य सुविधाएं दी जाएं। -अनुज डिडवानिया, अध्यक्ष वाराणसी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एसोसिएशन

रियल इस्टेट सेक्टर के लिए अलग-अलग जीएसटी स्लैब हैं। इन्हें कम करने के साथ ही एक किया जाए। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। -अनिल कुमार सिंह, महासचिव, वाराणसी बिल्डर्स एंड डवेलपर्स एसोसिएशन

जीएसटी का अलग-अलग स्लैब कारोबार में अड़चन पैदा करता है। ऐसे में अगर जीएसटी को एक स्लैब में लाया जाए तो सेक्टर से जुड़े लोगों को आसानी होगी। -नरेश कोहली, उपाध्यक्ष रुद्रा ग्रुप

सर्किल रेट पर प्रशासन का नियंत्रण नहीं नजर आता। साथ ही मार्केट रेट और सर्किल रेट दोनों में सामंजस्य नहीं है। इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। - नितेश बहल, निदेशक, ड्रीमलैंड होल्डिंग्स

नोएडा, गाजियाबाद को छोड़ दिया जाए तो वाराणसी समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में रियल इस्टेट के प्रोजेक्ट सफल और सुरक्षित रहे हैं। शासन, प्रशासन व्यावहारिक दिक्कतों पर ध्यान दे तो यह सेक्टर और भी समृद्ध बने।- रमन सिंह, उपाध्यक्ष वाराणसी बिल्डर्स एंड डवेलपर्स एसोसिएशन

बिल्डिंग मैटेरियल अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश में ज्यादा है। इस पर नियंत्रण हो। साथ ही रियल सेक्टर के लिए जोनल प्लान बनाने और उसके क्रियान्वयन की जरूरत है। -दीपक बहल, प्रबंध निदेशक, ड्रीमलैंड होल्डिंग्स 

मंदी मन का वहम है। यही सही वक्त है खरीदारी का। रेरा के कुछ नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए। प्रदेश व केंद्र सरकार के बीच बेहतर सामंजस्य इस सेक्टर में तेजी ला सकता है। - मयंक कुमार गुप्ता, मैनेजिंग डायरेक्टर, स्वास्तिक सिटी प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड

सरकार अपने हिस्से का काम कर ले तो कारोबारियों के लिए काफी आसानी होगी। सिंगल विंडो सिस्टम की बात नहीं बल्कि इस व्यवस्था को व्यवहार में लाया जाए। - अरुण कुमार अग्रवल, प्रबंध निदेशक, रूद्रा रीयल इस्टेट लिमिटेड

बिल्डर की बेसिक जरूरतें नहीं पूरी हो पा रही हैं। जीएसटी को एक स्लैब में लाने के साथ ही कारोबारियों को सकारात्मक माहौल प्रदान किया जाए। -निशीथ पांडेय, निदेशक, एला इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड

सीमेंट, सरिया सबका दाम बढ़ता जा रहा है। इस पर लगाम लगे। साथ ही रेरा के नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए। उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद देने के लिए हम कटिबद्ध हैं। - अवध किशोर सिंह, निदेशक, एला इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड

नोट बंदी, जीएसटी, रेरा, सरकार एक के बाद एक फरमान जारी कर दे रही है। लगातार सख्ती करती जा रही है। विकास के लिए जरूरी है कि नर्मी लाने के साथ ही सरलीकरण किया जाए। - अजय कुमार गुप्ता, अधिष्ठाता, अजय फर्नीचर, मलदहिया

बाजार उपभोक्ता के अनुकूल हैं। हमें सब्र के साथ ही विश्वास जताना होगा। जोनल योजना बनाने की जरूरत है और खरीदारी के लिए आगे आना होगा। - राजकुमार अग्रवाल, प्रोपराइटर, रेसिको एंड 

जीएसटी में नए-नए बदलाव कारोबार में अड़चन पैदा करते हैं। इनमें सरलीकरण के साथ उसे एक स्लैब में लाने की जरूरत है। इससे कारोबार आसान बनेगा और ग्राहक को बेहतर उत्पाद दे पाएंगे। - दीपक जायसवाल उर्फ मोनू, गोपी फर्नीचर, मलदहिया

लोगों के पास धन है, आपके (कारोबारी) के पास मकान है। एक दूसरे के सामंजस्य से इस सेक्टर में बूम लाया जा सकता है। सरकार को ऐसी पॉलिसी बनानी होगी, जिससे कि उपभोक्ता खरीदारी के लिए आगे आए। बैंक, ग्राहक के हाथ में ईमानदार पैसा दे। वहीं चलायमान पैसे पर सरकार नजर रखना बंद करे। इससे रियल इस्टेट सेक्टर में छाई सुस्ती दूर होगी।  
-डॉ. अनूप मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, डीएवी पीजी कॉलेज

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