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दो माह से खड़ी गाड़ियों को दो घंटे में कैसे करें तैयार
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वाराणसी। प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने की मुहिम में जुटे प्रशासन ने अधिग्रहण के बावजूद बसों को उपलब्ध नहीं कराने पर बस मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इसके बावजूद प्राइवेट बस ऑपरेटर्स इस मामले में अपने रुख पर अड़े हैं। उनका कहना है कि दो महीने से खड़ी गाड़ियों को दो घंटे में ठीक नहीं किया सकता है। बसों के ड्राइवर घरों में हैं तो वे आने को तैैयार भी नहीं हैं।
रेलवे के जरिए वाराणसी आ रहे प्रवासियों को घर तक पहुंचाने के लिए जिले के 406 वाहनों का अधिग्रहण किया गया है। इसमें से मात्र 37 बसें ही उपलब्ध हुई और शेष 369 वाहन स्वामियों द्वारा अधिग्रहण आदेश के बावजूद भी निर्धारित समय व स्थान पर वाहन नहीं उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही इस संबंध में कोई लिखित सूचना भी नहीं दी गई। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरुण कुमार राय की ओर से 369 बसों के वाहन स्वामियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत बड़ागांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई को बस ऑपरेटर्स भी एक तरफा मान रहे हैं और इसे न्याय संगत नहीं मान रहे हैं।
बसें दो महीने से खड़ी हैं और ड्राइवर घरों से निकलने को तैयार नहीं हैं। आरटीओ ने यूनियन से बात तक नहीं की और बसों के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। रोडवेज की बसों को 40 रुपये प्रति किलोमीटर किराया दिया जा रहा है, जबकि प्राइवेट बसों के ड्राइवर को पानी भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में यूनियन किसी दबाव में नहीं आएगा।
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विजय प्रताप सिंह, अध्यक्ष, प्राइवेट बस संचालन कल्याण समिति
बस संचालकों को नोटिस दिया गया है और आपदा के वक्त में सरकारी सहायता नहीं करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मामले में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार राय, एआरटीओ
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रेलवे के जरिए वाराणसी आ रहे प्रवासियों को घर तक पहुंचाने के लिए जिले के 406 वाहनों का अधिग्रहण किया गया है। इसमें से मात्र 37 बसें ही उपलब्ध हुई और शेष 369 वाहन स्वामियों द्वारा अधिग्रहण आदेश के बावजूद भी निर्धारित समय व स्थान पर वाहन नहीं उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही इस संबंध में कोई लिखित सूचना भी नहीं दी गई। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरुण कुमार राय की ओर से 369 बसों के वाहन स्वामियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत बड़ागांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई को बस ऑपरेटर्स भी एक तरफा मान रहे हैं और इसे न्याय संगत नहीं मान रहे हैं।
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बसें दो महीने से खड़ी हैं और ड्राइवर घरों से निकलने को तैयार नहीं हैं। आरटीओ ने यूनियन से बात तक नहीं की और बसों के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। रोडवेज की बसों को 40 रुपये प्रति किलोमीटर किराया दिया जा रहा है, जबकि प्राइवेट बसों के ड्राइवर को पानी भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में यूनियन किसी दबाव में नहीं आएगा।
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विजय प्रताप सिंह, अध्यक्ष, प्राइवेट बस संचालन कल्याण समिति
बस संचालकों को नोटिस दिया गया है और आपदा के वक्त में सरकारी सहायता नहीं करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मामले में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार राय, एआरटीओ