{"_id":"67205a57c3eb440f540b9728","slug":"burns-ward-with-only-30-beds-for-43-lakh-population-in-case-of-burns-on-diwali-in-varanasi-2024-10-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दीपावली की ये कैसी तैयारी: 43 लाख आबादी के लिए बस 30 बेड का बर्न वार्ड, बनारस में एक भी प्लास्टिक सर्जन नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दीपावली की ये कैसी तैयारी: 43 लाख आबादी के लिए बस 30 बेड का बर्न वार्ड, बनारस में एक भी प्लास्टिक सर्जन नहीं
Tue, 29 Oct 2024 09:15 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 29 Oct 2024 09:15 AM IST
सार
Diwali 2024 : वाराणसी जिले की आबादी 43 लाख है। वहीं हर साल दीपावली पर पटाखों से जलने की घटना वाले मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। बावजूद इसके जिले में केवल 30 बेड का बर्न वार्ड है। हैरान करने वाली बात तो ये है कि सरकरी अस्पतालों में एक भी प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं है।
विज्ञापन
दिवाली 2024
- फोटो : Freepik.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हर साल दीपावली पर पटाखे से जलने की समस्या लेकर लोग अस्पतालों में पहुंचते हैं। जिले की आबादी इस समय 43 लाख है, लेकिन बर्न वार्ड में केवल 30 बेड हैं। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में 20 बेड का बर्न वार्ड है, जबकि बीएचयू में भी करीब 10 बेड का वार्ड बनवाया गया है। इसके अलावा किसी भी अस्पताल में बर्न वार्ड नहीं है।
विज्ञापन
ऐसे में कोई मरीज इमरजेंसी में आता है तो सर्जन सहित अन्य चिकित्सक उनका इलाज करते हैं। सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब जलने की कोई बड़ी घटना हो और उसमें इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन की जरूरत पड़ती है।
विज्ञापन
स्थिति यह है कि जिले के सरकारी अस्पताल में इस बार भी प्लास्टिक सर्जन का संकट दूर नहीं हो पाया है। लिहाजा दीपावली पर अगर कोई घटना हुई तो बिना प्लास्टिक सर्जन के ही जलने वाले मरीजों का इलाज होगा।
विज्ञापन
जिले में हर साल दीपावली और उसके अगले दिन लोग इमरजेंसी में पटाखों की वजह से हाथ जलने, झुलसने की समस्या लेकर पहुंचते हैं। गंभीरावस्था में पहले मंडलीय अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती करवाया जाता है, लेकिन अगर प्लास्टिक सर्जन की जरूरत होती है तो बीएचयू रेफर किया जाता है। करीब दस साल पहले मंडलीय अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन डॉ. एके प्रधान थे, उनके रिटायर होने के बाद अब तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी है।
क्या बोले अधिकारी
सभी सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में बर्न की समस्या वाले मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगाई गई है। अगर किसी को बीएचयू रेफर किया जाएगा तो वहां भी उनका बेहतर इलाज करवाया जाएगा। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ
क्या बोले अधिकारी
सभी सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में बर्न की समस्या वाले मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगाई गई है। अगर किसी को बीएचयू रेफर किया जाएगा तो वहां भी उनका बेहतर इलाज करवाया जाएगा। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ