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काशी में गंगा की सफाई में गोलमाल, घाट किनारे खड़ी रहती है तीन करोड़ की मशीन
पीयूष तिवारी,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:03 AM IST
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गंगा किनारे खड़ी
- फोटो : amar ujala
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काशी में गंगा की सफाई के लिए तीन करोड़ की स्कीमर मशीन तैनात है। इसका काम गंगा की धारा से प्लास्टिक कचरा और पूजा सामग्री निकालना है। मगर यह मशीन अधिकांश समय लंगर डाले खड़ी रहती है और इसके कर्मचारी गोला घाट पर ताश खेलते नजर आते हैं।
सफाई के नाम पर यह स्कीमर धारा में एक चक्कर लगाता है, जिसका वीडियो बनाकर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा को भेज दिया जाता है और इसी आधार पर भुगतान होता है। हालांकि इसकी मॉनिटरिंग के लिए नगर निगम का इंस्पेक्टर भी तैनात किया गया है।
काशी में गंगा के जलधारा की सफाई के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की ओर से अप्रैल 2016 में यह मशीन दी गई थी। कोयंबटूर की कंपनी कॉन्फिडेंट इंजीनियरिंग इसका संचालन कर रही है। इस मशीन का कार्य रोज घाटों के पास जलधारा से फूल, मालाएं, प्लास्टिक, बोतल और कपड़े छानकर निकालना है।
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मशीन को रोज खिड़किया घाट से सामने घाट तक गंगा की धारा में सफाई करनी होती है। मगर यह मशीन गोला घाट और आस पास के घाटों तक जाकर अपनी लॉगबुक मेंटेन कर लेती है और फिर गोला घाट पर खड़ी हो जाती है। शहर में किसी वीआईपी के आने या पर्व के समय अवश्य यह दिनभर काम करती नजर आ जाती है।
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सफाई के नाम पर यह स्कीमर धारा में एक चक्कर लगाता है, जिसका वीडियो बनाकर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा को भेज दिया जाता है और इसी आधार पर भुगतान होता है। हालांकि इसकी मॉनिटरिंग के लिए नगर निगम का इंस्पेक्टर भी तैनात किया गया है।
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काशी में गंगा के जलधारा की सफाई के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की ओर से अप्रैल 2016 में यह मशीन दी गई थी। कोयंबटूर की कंपनी कॉन्फिडेंट इंजीनियरिंग इसका संचालन कर रही है। इस मशीन का कार्य रोज घाटों के पास जलधारा से फूल, मालाएं, प्लास्टिक, बोतल और कपड़े छानकर निकालना है।
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मशीन को रोज खिड़किया घाट से सामने घाट तक गंगा की धारा में सफाई करनी होती है। मगर यह मशीन गोला घाट और आस पास के घाटों तक जाकर अपनी लॉगबुक मेंटेन कर लेती है और फिर गोला घाट पर खड़ी हो जाती है। शहर में किसी वीआईपी के आने या पर्व के समय अवश्य यह दिनभर काम करती नजर आ जाती है।
लागत और खर्च
ठेकेदार के अनुसार मशीन की कीमत 3 करोड़ रुपए है, इसके संचालन पर करीब 3.5 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च आता है। मशीन पर कुल 12 लोगों तैनात हैं। इनमें से 10 लोग माशीन संचालित करते हैं, जबकि दो लोग सुरक्षा के लिए तैनात हैं। मशीन में डीजल और पेट्रोल के दो इंजन लगे हैं।
अगर बहाव की दिशा में जाना है तो डीजल इंजन से काम लिया जाता है और विपरीत दिशा में जाने पर दोनों इंजन चलाने होते हैं। शनिवार दोपहर को गोला घाट पर मशीन खड़ी थी। इसका लंगर घाट पर लगे लोहे के गार्डर में बंधा था। कर्मचारी घाट पर बैठकर ताश खेल रहे थे। मशीन के बकेट में कचरा भरा था, उसे निकाला नहीं गया था।
अगर बहाव की दिशा में जाना है तो डीजल इंजन से काम लिया जाता है और विपरीत दिशा में जाने पर दोनों इंजन चलाने होते हैं। शनिवार दोपहर को गोला घाट पर मशीन खड़ी थी। इसका लंगर घाट पर लगे लोहे के गार्डर में बंधा था। कर्मचारी घाट पर बैठकर ताश खेल रहे थे। मशीन के बकेट में कचरा भरा था, उसे निकाला नहीं गया था।
इनका कहना है कि
-मशीन संचालक सुरेश मिश्रा का कहना है कि गंगा के सभी घाटों पर प्रतिदिन मशीन चलाई जाती है। प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ टन कचरा निकलता है। यह कचरा आईएलएफएस के कर्मचारियों को दे दिया जाता है, जो प्रतिदिन लेकर जाते हैं। यह मशीन गंगा के इस पार के अलावा उस पार जाकर भी सफाई करती है।
-आईएलएफएस अधिकारी अनुपम मिश्रा का कहना है कि गंगा की धारा में सफाई का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है। उस कंपनी के कर्मचारी अपना कचरा कहां फेंकते हैं। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। हमारी कंपनी के साथ कोई टाईअप नहीं है, और न ही उनके द्वारा निकाला गया कचरा हमारे कर्मचारी ले जाते हैं। बहुत दिनों से तो उनके कर्मचारी दिख भी नहीं रहे हैं।
-नगर निगम के अपर नगर आयुक्त रमेश चन्द्र सिंह का कहना है कि मेरी जानकारी के अनुसार मशीन प्रतिदिन चल रही है। प्रतिदिन गंगा में अस्सी घाट तक की सफाई भी करती है। उसके संचालन के फोटो भी मुझे भेजे जाते हैं। उसके आधार पर ही उसका पेमेंट किया जाता है। अगर संचालन नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-प्रतिदिन गंगा स्नान और सफाई करने वाले राजेश शुक्ला का कहना है कि हम तो रोज घाट पर जाते हैं, लेकिन एक दो बार ही मुझे मशीन गंगा में चलते हुए दिखी है। नमामि गंगे की ओर से इतना खर्च किया जा रहा है, लेकिन सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
-नाव संचालक बच्ची साहनी का कहना है कि हम तो सुबह से लेकर शाम तक दशाश्वमेध घाट पर नावों का संचालन कराते हैं, लेकिन सफाई करने वाली मशीन नहीं दिखती है। अगर मशीन चलती तो यहां फूल माला और कचरे की यह स्थित नहीं होती।
-आईएलएफएस अधिकारी अनुपम मिश्रा का कहना है कि गंगा की धारा में सफाई का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है। उस कंपनी के कर्मचारी अपना कचरा कहां फेंकते हैं। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। हमारी कंपनी के साथ कोई टाईअप नहीं है, और न ही उनके द्वारा निकाला गया कचरा हमारे कर्मचारी ले जाते हैं। बहुत दिनों से तो उनके कर्मचारी दिख भी नहीं रहे हैं।
-नगर निगम के अपर नगर आयुक्त रमेश चन्द्र सिंह का कहना है कि मेरी जानकारी के अनुसार मशीन प्रतिदिन चल रही है। प्रतिदिन गंगा में अस्सी घाट तक की सफाई भी करती है। उसके संचालन के फोटो भी मुझे भेजे जाते हैं। उसके आधार पर ही उसका पेमेंट किया जाता है। अगर संचालन नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-प्रतिदिन गंगा स्नान और सफाई करने वाले राजेश शुक्ला का कहना है कि हम तो रोज घाट पर जाते हैं, लेकिन एक दो बार ही मुझे मशीन गंगा में चलते हुए दिखी है। नमामि गंगे की ओर से इतना खर्च किया जा रहा है, लेकिन सफाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
-नाव संचालक बच्ची साहनी का कहना है कि हम तो सुबह से लेकर शाम तक दशाश्वमेध घाट पर नावों का संचालन कराते हैं, लेकिन सफाई करने वाली मशीन नहीं दिखती है। अगर मशीन चलती तो यहां फूल माला और कचरे की यह स्थित नहीं होती।