एक गोली ने उजाड़ दिए सपने: 22 साल की कानूनी लड़ाई के बाद परिवार को मिला न्याय, हत्या केस में चार सगे भाई दोषी
छेका होने के बाद तीन महीने में शादी होनी थी, लेकिन एक गोली ने युवती के परिवार के सपने उजाड़ दिए। हत्या के मामले में करीब 22 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद परिवार को न्याय मिला। इस दौरान सुनवाई के लिए 1500 से अधिक तारीखें पड़ीं और परिजनों को 10-12 बार हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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जौनपुर में लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मियापुर निवासी आशीष कुमार मौर्य (19) हत्याकांड में 22 साल बाद मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अनिल कुमार यादव की अदालत ने चार सगे भाइयों को दोषी करार दिया। अब 26 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।
पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि दोषियों को कम से कम उम्रकैद की सजा मिलेगी। मृतक की मां शर्मिला देवी, पिता छेदीलाल और अन्य परिजनों ने न्यायालय पर भरोसा जताया है। परिवार के लोग घटना को याद करते हुए बताते हैं कि आशीष का छेका हो चुका था और तीन महीने बाद उसकी शादी होनी थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन 16 अगस्त 2004 को हुई घटना ने परिवार के सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
आशीष तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके चचेरे भाई और हाईकोर्ट में अधिवक्ता पवन मौर्य ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पवन और उनके पिता जियालाल ने बताया कि 16 अगस्त 2004 की सुबह करीब 8:30 बजे मियापुर तिराहे पर जमीन के विवाद में पट्टीदार आशीष कुमार मौर्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पवन ने लाइन बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में रामसेवक मौर्य, उनके चार पुत्र अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन तथा पड़ोसी राजेश उर्फ छोटू को आरोपी बनाया गया था। रामसेवक मौर्य के घर से लाइसेंसी बंदूक बरामद हुई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामसेवक की मृत्यु हो गई, जबकि राजेश उर्फ छोटू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन को दोषी करार दिया। पवन मौर्य ने कहा कि वर्षों तक अदालत के चक्कर काटने के बाद न्याय मिलना राहत की बात है, लेकिन इतने लंबे समय बाद मिले न्याय की पीड़ा अलग है।
उन्होंने बताया कि हत्या के समय आशीष का छेका हो चुका था और तीन महीने बाद उसकी शादी होनी थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन एक घटना ने सब कुछ बदल दिया। पवन और जियालाल के मुताबिक, न्याय की लड़ाई में परिवार को करीब 1500 तारीखों पर अदालत जाना पड़ा।
आरोपियों की ओर से मामले में स्टे लिए जाने के कारण उन्हें 10 से 12 बार हाईकोर्ट की शरण भी लेनी पड़ी। अब 26 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी है। परिवार को उम्मीद है कि दोषियों को कम से कम उम्रकैद की सजा मिलेगी। परिजनों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है।