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Varanasi News: गंगा किनारे टेंट सिटी बनवाना वीडीए के क्षेत्राधिकार में नहीं, विलेन की भूमिका निभाई

Tue, 31 Oct 2023 12:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Oct 2023 12:55 AM IST
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Building tent city on the banks of Ganga is not within the jurisdiction of VDA, played the role of villain
वाराणसी। गंगा उस पार रेती पर टेंट सिटी बनवाने और दोबारा प्रयास करने पर एनजीटी ने तीखी टिप्पणी की है। तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि संयुक्त समिति की 24 मई की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि टेंट सिटी का निर्माण गंगा के तल में हुआ है।
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न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि गंगा का जलस्तर कुछ कम हुआ और टेंट सिटी बना दी गई। इस मामले में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) का रोल विलेन का है। वीडीए पर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जुर्माना लगना चाहिए। वीडीए की तरफ से अधिवक्ता के.एम. नटराजन ने कहा कि हमारी कोई गलती नहीं है, इसपर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की किस धारा के तहत वाराणसी विकास प्राधिकरण को यह अधिकार मिल गया कि वह गंगा के तल एवं आसपास टेंट सिटी बना दे ? यह वीडीए के क्षेत्राधिकार में ही नहीं है। गंगा की तलहटी में टेंट सिटी या फिर कोई स्थायी, अस्थायी निर्माण कराने का अधिकार किसी को नहीं है। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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प्राइवेट कंपनी ने बनाई टेंट सिटी, एनओसी ले रहा वीडीए


एनजीटी ने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि टेंट सिटी प्राइवेट कंपनियां बनाएं और अनुमति के लिए आवेदन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की जगह वीडीए को दें। वीडीए की एनओसी ले। सुनवाई के दौरान एनएमसीजी से प्राप्त एनओसी मांगी गई तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था।
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दोषी हैं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, करें कार्रवाई



एनजीटी ने सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव को कहा की क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने अपने जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया है। मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका सवालों के घेरे में है। क्षेत्रीय अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।




डिनोटिफाइड करते ही कैसे चले गए कछुए



एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीटी) को गंगा के बाढ़ क्षेत्र एवं नदी तल का सीमांकन करके स्पष्ट रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान जब सरकार और टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों की तरफ से कहा गया कि कछुआ अभयारण्य डिनोटिफाइड कर दिया गया है। इस पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कड़ी टिप्पणी की और कहा कि आपके द्वारा कछुआ अभयारण्य को डिनोटिफाइड करने से कछुआ वहां से चले गए या आप लेकर चले गए। जलचर कैसे चले जाएंगे।
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