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भैया-दूज की पूजा के लिए कुंडों से गंगा तट तक रेला

Wed, 02 Nov 2016 02:20 AM IST
Updated Wed, 02 Nov 2016 02:20 AM IST
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Brother-dooj pools for worshiping the Ganga surge up
परपंरागत ढंग से हुई गोवर्धन व अन्नकूट पूजा
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व भैया-दूज पर मंगलवार की काशी में सड़कों की पटरियों से लेकर कुंडों, गंगा तटों तक व्रतियों का मेला लग गया। बहनों ने गोधन कूटे। भाइयों को भला-बुरा कहने के बाद अपनी जीभ पर गुम भटकैया के कांटे चुभाकर पश्चाताप भी किया। भैया-दूज की पूजा के लिए शहर से ग्रामीण इलाके तक उत्सव जैसा माहौल नजर आया। कभी यमी ने अपने भाई यमराज के लिए यह पूजा की थी। सुबह ही बहनें गोधन कूटने के लिए घरों से निकल पडी़ं। गोवर्धन बनाए और फिर चावल के घोल से चौक बनाकर पूजा की। अस्सी स्थित पुष्कर तालाब के अलावा अस्सी घाट, ईश्वरगंगी तालाब, बउलिया, चांदपुर, मंडुवाडीह, भिखारीपुर समेत कई इलाकों में बहनों ने भैया-दूज व्रत रखकर गोधन की पूजा की।
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भैया -दूज का भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भइया दूज और गोवर्धन पूजा ग्रामीण इलाकों में भी मंगलवार को श्रद्धा एवं उत्साह से मनाई गई। सुबह बहनों ने भाई को श्राप दिया। फिर गोवर्धन की पूजा की और अपनी जीभ पर भटकटइया के कांटे चुभोकर पश्चाताप किया। इसके बाद भाइयों को मिठाई, चना और सुपाड़ी खिलाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। कुछ गांवों में युवकों ने साहसी खेल भी दिखाए।
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गांवों में सुबह महिलाओं ने गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाई और फिर चूड़ा, लाई, घरिया आदि से उसकी पूजा की। इस दौरान मंगल गीत भी गाए गए। चौबेपुर क्षेत्र के अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, चुमकुनी, चौबेपुर, डुबकिया, कैथी आदि गांवों में गोवर्धन पूजा और भइया दूज का त्योहार मनाया गया। दानगंज क्षेत्र के बाबतपुर, नियार, रजला, ऊधो रामपुर, दानगंज, अजगरा, जरियारी, हाजीपुर, कपिसा आदि गांवों में दोनों त्योहार श्रद्धा के साथ मनाए गए। इसी तरह हरहुआ आयर, अहिरौली, औरा, पुआरीकला, पुआरीखुर्द, हरहुआ बाजार और काजीसराय आदि गांवों में भी गोवर्धन की पूजा हुई।
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इलाके के शहंशाहपुर में गोवर्धन पूजा के बाद साहसिक खेलों का आयोजन किया गया। इसमें श्रीधर मिश्र ने 50 किलो के गदे का भांजकर तो अशोक पहलवान ने भारी नाल को उठाकर अपने साहस का प्रदर्शन किया। कई युवकों ने आग के गोले से कूदने का हुनर दिखाया।
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