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Gyanvapi Case: पूरे ज्ञानवापी परिसर की एएसआई से अतिरिक्त सर्वे कराने की अर्जी खारिज, पढ़ें- पूरा मामला

Fri, 25 Oct 2024 06:54 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Fri, 25 Oct 2024 06:54 PM IST
सार

वाराणसी ज्ञानवापी के जुड़े मामले में हिंदू पक्ष को झटका लगा है। 1991 के मुकदमे में वाराणसी कोर्ट में चल रहे  मुकदमे में हिंदू पक्ष द्वारा सर्वे का आवेदन खारिज कर दिया गया है । हिंदू पक्ष के अधिवक्ता का कहना है ये इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाकर अपील करेंगे।
 

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Gyanvapi Case Application for conducting additional survey by ASI rejected
हिंदू पक्ष के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

ज्ञानवापी के पूरे परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से अतिरिक्त सर्वे कराने की लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की मांग वाली अर्जी शुक्रवार को अदालत ने खारिज कर दी। यह फैसला सिविल जज (सीनियर डिवीजन) /फास्ट ट्रैक युगल शंभू की अदालत ने सुनाया। अर्जी का विरोध अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने किया था।
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अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि 30 अक्तूबर तय की है। उधर, लॉर्ड विश्वेश्वनाथ के वाद मित्र ने कहा कि अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलते ही वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल करेंगे। आदेश सुनाने वाली अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किया है।
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अदालत ने 27 पन्ने के अपने आदेश में कहा कि सभी तथ्यों-परिस्थितियों, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर विचार किया गया। निष्कर्ष यह है कि एएसआई द्वारा ज्ञानवापी के सर्वे के संबंध में पहले से दाखिल रिपोर्ट की जांच अभी की जानी है। दूसरा, जिस संरचना में शिवलिंग पाया जाना बताया गया है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश से संरक्षित है। इसके अतिरिक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि गैर-आक्रामक पद्धति का उपयोग करके ज्ञानवापी परिसर में सर्वे किया जाए। 

ज्ञानवापी में उत्खनन तकनीक का उपयोग न किया जाए। मौजूदा संरचना को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचना चाहिए। वादी ने अपने आवेदन में ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे के लिए कोई कारण नहीं बताए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सर्वे के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने के संबंध में निर्णय निचली अदालत पर छोड़ दिया है। ऐसे में पूरे ज्ञानवापी परिसर में एएसआई के अतिरिक्त सर्वे का आवेदन अस्वीकार करने योग्य है।
 
यह तो होना ही था, न्याय की जीत हुई: यासीन
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह तो होना ही था। न्याय की जीत हुई है। ज्ञानवापी की सर्वे रिपोर्ट पहले से ही कोर्ट में दाखिल है। अभी उस पर चर्चा भी नहीं हुई है। इसके बावजूद दोबारा सर्वे के लिए अर्जी देना हमारी समझ से परे था। सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइन तय की है, उसका पालन करते हुए ट्रायल कोर्ट ने स्वागत योग्य आदेश दिया है।

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