महामारी के बीच कई राज्यों में बर्ड फ्लू की दस्तक से वाराणसी में बढ़ी सतर्कता, जानें लक्षण व बचाव के उपाय
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कोरोना वायरस ने पहले से ही दुनियाभर के लोगों को परेशान कर रखा है और अब भारत में फैल रही एक और बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, देश में बर्ड फ्लू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसके मामले कई राज्यों में देखने को मिले हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में तो इसको लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश में मछली, मुर्गे व अंडों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि अभी उतर प्रदेश में एक भी मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके पशुपालन विभाग और वन विभाग ने चौकसी बढ़ा दी है। वाराणसी में भी विभाग सतर्क हो गया है।
प्रभागीय वनाधिकारी महावीर कौजलगी ने बताया कि पूरे वाराणसी जनपद में पक्षियों के मरने की घटनाओं पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा चिड़ियाघर में भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। फिलहाल अभी तक किसी पक्षी के मरने की कोई सूचना नहीं मिली है। उधर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि जिले के तमाम मुर्गी पालकों को सर्विलांस पर रखा गया है। मुर्गियों के मरने पर उनका पोस्टमार्टम भी किया जा रहा। हालांकि अभी बर्ड फ्लू जैसे कोई संकेत सामने नहीं आये है। जिलेभर में पशु चिकित्सक समय समय पर जांच भी कर रहे है। आगे पढ़ें, इस बीमारी के कारण, लक्षण और इससे बचाव के उपाय...
बता दें कि राजस्थान में तो बर्ड फ्लू की वजह से अब तक 500 से अधिक कौओं की मौत हो चुकी है। बाकी राज्यों का भी कुछ ऐसा ही हाल है। ऐसा नहीं है कि यह बीमारी सिर्फ पक्षियों तक ही सीमित रहती है, बल्कि यह इंसानों के लिए भी बहुत खतरनाक है।
इंसानों के लिए भी खतरनाक है यह बीमारी
- बर्ड फ्लू एक ऐसी बीमारी है, जो सिर्फ पक्षियों को ही नहीं, बल्कि जानवरों और इंसानों के लिए भी उतना ही खतरनाक है। इस बीमारी से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान आसानी से इससे संक्रमित हो जाते हैं। इससे मौत भी हो सकती है।
- बर्ड फ्लू को एवियन इंफ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन (संक्रमण) होता है। वैसे तो बर्ड फ्लू कई प्रकार हैं, लेकिन एच5एन1 (H5N1)पहला ऐसा बर्ड फ्लू वायरस था, जिसने पहली बार इंसान को संक्रमित किया था। इसका पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में सामने आया था। यह बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से इंसानों में होती है।
बर्ड फ्लू का खतरा किसे अधिक?
- मुर्गी पालन से जुड़े लोगों को बर्ड फ्लू का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोगों, संक्रमित जगहों पर जाने वाले लोगों, कच्चा या अधपका चिकन या अंडा खाने वाले लोगों को भी इससे संक्रमित होने का खतरा रहता है।
बर्ड फ्लू के लक्षण
- खांसी (आमतौर पर सूखी खांसी)
- गले में खराश, बंद नाक या नाक बहना
- थकान, सिरदर्द
- ठंड लगना, तेज बुखार
- जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द
- नाक से खून बहना
- सीने में दर्द
अगर आपको इस तरह के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
- चिकन या अंडा खाने से बचें
- समय-समय पर अपने हाथ साबुन-पानी से धोते रहें
- पक्षियों से दूर रहें
- ऐसी जगहों पर जाने से बचें, जहां बर्ड फ्लू का प्रकोप है
- इंफ्लूएंजा का टीका लगवाने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।