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सोनभद्र के दो विधानसभा सीटों पर बड़ा उलटफेर
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/सोनभद्र
Updated Wed, 04 Jan 2017 09:38 PM IST
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दोनों विधानसभा क्षेत्रों में हैं दो लाख से अधिक आदिवासी
- फोटो : प्रतिकात्मक तस्वीर
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निर्वाचन आयोग ने सीटों के आरक्षण में सोनभद्र के लिए बड़ा उलटफेर किया है। दुद्धी (अनुसूचित जाति) और ओबरा सामान्य सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया है।
इससे एक दशक से सीटों को जनजाति के लिए आरक्षित करने की लड़ाई लड़ रहे लोगों में खुशी है। जबकि चुनाव में ताल ठोक चुके प्रत्याशी इस फैसले से निराश हैं।
डीएम सीबी सिंह ने आरक्षण में हुए इस परिवर्तन की पुष्टि की है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जिले की चार विधानसभा सीटें थीं। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल और ओबरा विधानसभा सामान्य वर्ग और दुद्धी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी।
दरअसल गोड़ समेत कई अन्य जातियों को वर्ष 2002 में अनुसूचित जाति से जनजाति में शामिल कर दिया गया था।
इससे एसटी में शामिल हुए नेता एससी सीट पर चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। वर्ष 2005 और 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए तो जनजाति लोग सिर्फ वोटर बनकर रह गए थे।
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लेकिन वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जनजातियों को चुनाव लड़ने का मौका मिला। लेकिन वर्ष 2002 के बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में जनजातियों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला।
इसको लेकर आदिवासी नेता विजय सिंह गोड़ सुप्रीम कोर्ट तक गए। लेकिन इन दोनों सीटों पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
अब बुधवार को निर्वाचन आयोग ने ओबरा, दुद्धी को जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। ऐसे में इनको विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
बता दें कि वर्ष 2002 के पहले दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। वर्ष 2012 में जिले में चार सीटों का सृजन हुआ था। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल, दुद्धी और ओबरा सीट बनी, जबकि इसके पूर्व राबर्ट्सगंज अनुसूचित जाति, राजगढ़ आंशिक सामान्य और दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी।
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इससे एक दशक से सीटों को जनजाति के लिए आरक्षित करने की लड़ाई लड़ रहे लोगों में खुशी है। जबकि चुनाव में ताल ठोक चुके प्रत्याशी इस फैसले से निराश हैं।
डीएम सीबी सिंह ने आरक्षण में हुए इस परिवर्तन की पुष्टि की है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जिले की चार विधानसभा सीटें थीं। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल और ओबरा विधानसभा सामान्य वर्ग और दुद्धी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी।
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दरअसल गोड़ समेत कई अन्य जातियों को वर्ष 2002 में अनुसूचित जाति से जनजाति में शामिल कर दिया गया था।
इससे एसटी में शामिल हुए नेता एससी सीट पर चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। वर्ष 2005 और 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए तो जनजाति लोग सिर्फ वोटर बनकर रह गए थे।
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लेकिन वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जनजातियों को चुनाव लड़ने का मौका मिला। लेकिन वर्ष 2002 के बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में जनजातियों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला।
इसको लेकर आदिवासी नेता विजय सिंह गोड़ सुप्रीम कोर्ट तक गए। लेकिन इन दोनों सीटों पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
अब बुधवार को निर्वाचन आयोग ने ओबरा, दुद्धी को जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। ऐसे में इनको विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
बता दें कि वर्ष 2002 के पहले दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। वर्ष 2012 में जिले में चार सीटों का सृजन हुआ था। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल, दुद्धी और ओबरा सीट बनी, जबकि इसके पूर्व राबर्ट्सगंज अनुसूचित जाति, राजगढ़ आंशिक सामान्य और दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी।