{"_id":"635ccb22fdc5b65f46693c4b","slug":"big-secret-is-hidden-in-nag-nathaiya-leela-why-is-kadamba-s-branch-brought","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नाग नथैया लीला में छिपा है बड़ा रहस्य: दस मिनट की लीला और लाखों श्रद्धालु..क्यों लाई जाती है कदंब की डाल ?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाग नथैया लीला में छिपा है बड़ा रहस्य: दस मिनट की लीला और लाखों श्रद्धालु..क्यों लाई जाती है कदंब की डाल ?
Sat, 29 Oct 2022 12:11 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Sat, 29 Oct 2022 12:11 PM IST
सार
वाराणसी में आज नाग नथैया लीला का मंचन होगा। प्रातःकाल पांच बजे संकटमोचन मंदिर परिसर स्थित वन से कदंब की डाल लाई गई और तुलसी घाट पर गंगा के तट पर स्थापित की गई।
विज्ञापन
तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित तुलसी घाट की कृष्ण लीला में आज नाग नथैया लीला का मंचन होगा। प्रातःकाल पांच बजे संकटमोचन मंदिर परिसर स्थित वन से कदंब की डाल लाई गई और तुलसी घाट पर गंगा के तट पर स्थापित की गई, जिस पर शाम चार बजकर चालीस मिनट पर भगवान श्री कृष्ण कदम की डाली पर चढ़कर गंगा (आज यमुना का रुप धारण किया है ) में कूदते हैं।
विज्ञापन
अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रोफेसर विशंभर नाथ मिश्र के सानिध्य में एवं देखरेख में आयोजित इस नाग नथैया के इस दस मिनट की लीला में भगवान श्री कृषण यमुना में स्थित कालिया नाग को दमन करते हैं।
विज्ञापन
तुलसीघाट पर नाग नथैया की लीला देखने के लिए उमड़ा हुजूम।
कहने को तो यह यह दस मिनट की कालिया दमन की लीला है लेकिन इसमें बहुत बड़ा गूढ़ रहस्य छिपा है। मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने आज से 400 वर्ष पूर्व इस लीला का मंचन करते समय सोचा कि आने वाले समय में हमारी नदियां प्रदूषित होंगी तो उसको कैसे बचाया जाए तो उन्होंने इस लीला के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि हमारी नदियां प्रकृति द्वारा मिले अनमोल रत्न है।
इनको सहेजने की जरूरत है नहीं तो वह समाप्त हो जाएंगी।
आज गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा आदि नदियां प्रदूषण से कराह रही हैं। सरस्वती नदी तो लुप्त प्राय ही हो गई हैं। आज जरूरत है प्रकृति द्वारा मिले इन अनमोल रत्नों नदियों को बचाने की, नहीं तो आने वाला कल हमारे लिए विनाश की तरह होगा। अगर आज जल नहीं बचेगा तो हमारा कल भी नहीं होगा। हमारा भविष्य अंधकार में हो जाएगा क्योंकि जल ही जीवन है और अगर जल नहीं बचेगा तो जीवन के बारे में सोचना ही मूर्खता है -रामयश मिश्र
इनको सहेजने की जरूरत है नहीं तो वह समाप्त हो जाएंगी।
आज गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा आदि नदियां प्रदूषण से कराह रही हैं। सरस्वती नदी तो लुप्त प्राय ही हो गई हैं। आज जरूरत है प्रकृति द्वारा मिले इन अनमोल रत्नों नदियों को बचाने की, नहीं तो आने वाला कल हमारे लिए विनाश की तरह होगा। अगर आज जल नहीं बचेगा तो हमारा कल भी नहीं होगा। हमारा भविष्य अंधकार में हो जाएगा क्योंकि जल ही जीवन है और अगर जल नहीं बचेगा तो जीवन के बारे में सोचना ही मूर्खता है -रामयश मिश्र