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बड़ी उपलब्धि: BHU वैज्ञानिकों ने की सायनोबैक्टीरिया के नए जींस की पहचान, जैव विविधता के शोध में मिलेगी मदद

Thu, 25 Aug 2022 11:39 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 25 Aug 2022 11:39 PM IST
सार

सायनोबैक्टीरिया (नील हरित शैवाल) लगभग उन सभी पारिस्थितिक तंत्रों के महत्वपूर्ण घटक हैं जहां जीवन की कल्पना की जा सकती है। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने  सायनोबैक्टीरिया के एक नए जींस की पहचान की है। 

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Big achievement to BHU scientists identify new genes of cyanobacteria for biodiversity research
सायनोबैक्टीरिया के एक नए जींस की पहचान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा से सायनोबैक्टीरिया (नील हरित शैवाल) के एक नए जींस की पहचान की और उसकी जानकारी जुटाई है। वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन के दौरान यह खोज आधुनिक पॉलीफैसिक दृष्टिकोण का उपयोग कर की गई है। 

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पॉलीफैसिक दृष्टिकोण सायनोबैक्टीरिया या अन्य जीवों की पहचान करने में अन्य दृष्टिकोणों की तुलना में अधिक सटीक है। त्रिपुरा की मूल निवासी सागरिका पाल ने 2020 में अध्ययन शुरू किया था, वह सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह के निर्देशन में शोध कर रही हैं। 
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वैश्विक जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में जैव विविधता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जैव विविधता की पहचान और संरक्षण के लिए समर्पित प्रयास नहीं किए जाते, मानव जाति के समक्ष ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।  सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि सायनोबैक्टीरिया उन सभी पारिस्थितिक तंत्रों का महत्वपूर्ण घटक है, जहां जीवन की कल्पना की जा सकती है। यह वे जीव हैं, जो पृथ्वी के ऑक्सीजनीकरण के लिए जिम्मेदार हैं। 

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अमेरिकी प्रोफेसर के नाम पर रखा जींस का नाम

Big achievement to BHU scientists identify new genes of cyanobacteria for biodiversity research
वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के निर्देशन में शोध करने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला

खास बात यह है कि अमेरिका के महान फाइकोलॉजिस्ट प्रोफेसर जफरीआर जोहानसन के सम्मान में जींस का नाम जोहानसेनिएला रखा गया है। त्रिपुरेंसिस क्षेत्र से खोजे गए सायनोबैक्टीरियल जींस की पहली रिपोर्ट है, जो भारत में इस तरह के जेनेरा के गिने चुने निष्कर्षों में से एक है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट में बड़ी संख्या में सायनोबैक्टीरिया हो सकते हैं, जिनका पता नहीं चल पाया है। ऐसे में यह अध्ययन शोधकर्ताओं को खोज, पहचान और संरक्षण में मदद करने के लिए प्रेरित करेगा। 

टीम में ये भी शामिल
शोध करने वाली टीम में अनिकेत सराफ (आरजे कॉलेज, मुंबई), नरेश कुमार (पीएचडी छात्र, बीएचयू) और आरुष सिंह, उत्कर्ष तालुकदार और नीरज कोहर (एमएससी, वनस्पति विज्ञान, बीएचयू) भी शामिल थे। यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित शोध पत्रिका माइक्रोबायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित हुई है।

बीएचयू में शोध प्रवेश के लिए बनेगी आरक्षण नियमावली

बीएचयू में शोध प्रवेश में आरक्षण के नियमों का सही तरीके से पालन करने के छात्रों की मांग पर बीएचयू प्रशासन ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी का संयोजक कला संकाय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. मुकुल राज मेहता को बनाया गया है। इसके अलावा बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के प्रो. जनार्दन यादव, विधि संकाय से प्रो.विभा त्रिपाठी, सांख्यिकी से डॉ. दिनेश चौधरी को सदस्य बनाया गया है, जबकि असिस्टेंट रजिस्टार एकेडमिक को सदस्य सचिव बनाया गया है। कमेटी को शोध प्रवेश में दाखिले के लिए आरक्षण नीति की गाइडलाइन बनाकर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। 

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