पहल: हिंदी में होगा बाइबिल का अनुवाद, चर्च में गूंजेगी प्रार्थना; काशी विद्यापीठ का सहयोग लिया जाएगा सहयोग
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सहयोग से धर्मप्रांत काशी बाइबिल के हिंदी अनुवाद के लिए पहल करेगा। महागिरजा व धर्मप्रांत प्रमुख यूपी के साथ ही बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसकी शुरुआत करेंगे।
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धर्मप्रांत काशी ने बाइबिल के हिंदी अनुवाद के लिए पहल की है। इसके तहत बाइबिल के अनुवाद में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का सहयोग लिया जाएगा। पद्मभूषण फादर कामिल बुल्के की मंशानुसार धर्मप्रांत ने यह निर्णय लिया है। 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में प्रोटेस्टैंट मिशनरी कैरे ने बाइबिल का हिंदी अनुवाद तैयार किया था। धर्मशास्त्र के नाम से इसके बहुत से संस्करण छप चुके हैं और उसमें संशोधन भी होता रहा है।
2009 में यहोवा के साक्षियों ने एक हिंदी अनुवाद नई दुनिया अनुवाद मसीही यूनानी शास्त्र छापा। हालांकि यह आम जनमानस के लिए सरल नहीं है। आम जनमानस तक बाइबिल की शिक्षाओं को सरलता और सहजता से पहुंचाने के लिए हिंदी अनुवाद सरल भाषा में कराया जाएगा।
महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस दिशा में जल्द ही पहल की जाएगी। बाइबिल के अनुवाद में काशी के विद्वानों के साथ ही चर्च से जुड़े विद्वानों का भी सहयोग लिया जाएगा। धर्मप्रांत काशी के प्रमुख डॉ. बिशप यूजीन जोसेफ ने कहा कि फादर कामिल बुल्के की अंतिम इच्छा बाइबिल का हिंदी अनुवाद एवं प्रकाशन था, जिसे हम सब लोग मिलकर पूरा करेंगे। फादर बुल्के ने हमेशा हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए कार्य किया। इसके साथ ही चर्च में होने वाली प्रार्थनाओं को हिंदी में भी करने पर विचार किया जा रहा है।
66 ग्रंथों का संकलन है बाइबिल
बाइबिल कुल मिलाकर 66 ग्रंथों का संकलन है। पूर्व विधान में 39 तथा नव विधान में 27 ग्रंथ हैं। बाइबिल ईसाई धर्म (मसीही) पंथ की आधारशिला तथा ईसाइयों (मसीहियों) का पवित्रतम धर्मग्रंथ है। इसके दो भाग हैं पूर्वविधान और नवविधान। बाइबिल का पूर्वार्ध यहूदियों का भी धर्मग्रंथ है तथा उत्तरार्द्ध ईसा मसीह एवं उनकी शिक्षाओं पर आधारित है। पूर्वविधान में प्राचीन यहूदी धर्म और यहूदी लोगों की गाथाएं, पौराणिक कहानियां (खास तौर पर सृष्टि) आदि का वर्णन है। इसकी मूलभाषा इब्रानी और अरामी थी।
ईसा के शिष्यों ने लिखा था नवविधान
नवविधान ईसा मसीह के बाद की है, जिसे ईसा के शिष्यों ने लिखा था। इसमें ईसा (यीशु) की जीवनी, उपदेश और शिष्यों के कार्य लिखे गए हैं। इसकी मूलभाषा कुछ अरामी और अधिकतर बोलचाल की प्राचीन ग्रीक थी। इसमें खास तौर पर चार शुभसंदेश (सुसमाचार) हैं जो ईसा की जीवनी का उनके चार शिष्यों के नाम से किसी और के द्वारा वर्णन है मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस।
शताब्दियों से चल रहा है बाइबिल का अनुवाद
शताब्दियों से बाइबिल के अनुवाद का कार्य चला आ रहा है। इस्रायली लोग इब्रानी बाइबिल का छायानुवाद अरामेयिक बोलचाल में किया करते थे। सिकंदरिया के यहूदियों ने दूसरी शताब्दी ईपू में इब्रानी बाइबिल का यूनानी अनुवाद किया था जो सेप्टुआर्जिट (सप्तति) के नाम से विख्यात है। लगभग सन 400 ई. में संत जेरोम ने समस्त बाइबिल की लैटिन अनुवाद प्रस्तुत किया था और यह शताब्दियों तक बाइबिल का सर्वाधिक प्रचलित रूप रहा है। आधुनिक काल में इब्रानी तथा यूनानी मूल के आधार पर सहस्त्र से भी अधिक भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद हुआ है। पूर्वविधान का सर्वोत्तम प्रामाणिक इब्रानी पाठ किट्टल (सन् 1937 ई.) तथा यूनानी पाठ राल्फस (1914 ई.) ने किया।