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भगवान श्रेयसनाथ जैन अध्ययन निधि के लिए बीएचयू को मिलेगा 1.05 करोड़ रुपये का दान
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने जैन एजुकेशन इंस्टीट्यूट सपोर्ट के साथ रविवार को शैक्षणिक करार किया। इसके तहत भगवान श्रेयसनाथ जैन अध्ययन निधि की स्थापना बीएचयू में होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय को 1.05 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त होगी। जैन धर्म पर शैक्षणिक कार्यों को प्रोत्साहित करके अंतरराष्ट्रीय पटल तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया है।
भगवान श्रेयसनाथ जैन अध्ययन निधि जैन दर्शन पर अकादमिक अध्ययन व शोध को प्रोत्साहित करेगी व इसके लिए सहयोग उपलब्ध कराएगी। इससे बीएचयू के जैन दर्शन के विद्वानों (संकाय-सदस्य और पीएचडी छात्र दोनों) को इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी संवाद स्थापित करने के अवसर व सुविधाएं प्राप्त होंगी। इस पहल के अंतर्गत जैन दर्शन के अकादमिक अध्ययन के लिए संवाद के माध्यम के तौर पर अंग्रेजी पर जोर देने का प्रस्ताव है। शैक्षणिक सहयोग को मूर्त रुप देने के लिए कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने चार सदस्यीय कार्यक्रम समिति का गठन किया गया है। दर्शनशास्त्र विभाग, कला संकाय के प्रो. मुकुल राज मेहता समिति के अध्यक्ष होंगे। इसमें प्रो. प्रद्युम्न शाह सिंह और प्रो. अशोक कुमार जैन और डॉ. आनंद कुमार जैन समिति के सदस्य सचिव होंगे।
भारत ज्ञान व्यवस्था के प्रचार को मिलेगा बल
कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने इस महत्वपूर्ण उपहार के लिए जैन एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स सपोर्ट का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों के शैक्षणिक व शोध कार्यों को सहयोग उपलब्ध कराने के लिए धनराशि जुटाने की बीएचयू की मुहिम के लिए यह समझौता व दानराशि अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रयास के तहत भारत की प्राचीन ज्ञान व्यवस्था को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा। दानकर्ताओं की ओर से शर्मिला जैन ओसवाल ने कहा कि इस प्रारंभिक दानराशि का उद्देश्य जैन अध्ययन का विस्तार करने हेतु काशी हिंदू विश्वविद्यालय को सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में विश्वविद्यालय में जैन दर्शन में अध्ययन व गतिविधियों को और आगे बढ़ाने के लिए दानकर्ताओं द्वारा एक पीठ की स्थापना की भी उम्मीद है।
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भगवान श्रेयसनाथ जैन अध्ययन निधि जैन दर्शन पर अकादमिक अध्ययन व शोध को प्रोत्साहित करेगी व इसके लिए सहयोग उपलब्ध कराएगी। इससे बीएचयू के जैन दर्शन के विद्वानों (संकाय-सदस्य और पीएचडी छात्र दोनों) को इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी संवाद स्थापित करने के अवसर व सुविधाएं प्राप्त होंगी। इस पहल के अंतर्गत जैन दर्शन के अकादमिक अध्ययन के लिए संवाद के माध्यम के तौर पर अंग्रेजी पर जोर देने का प्रस्ताव है। शैक्षणिक सहयोग को मूर्त रुप देने के लिए कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने चार सदस्यीय कार्यक्रम समिति का गठन किया गया है। दर्शनशास्त्र विभाग, कला संकाय के प्रो. मुकुल राज मेहता समिति के अध्यक्ष होंगे। इसमें प्रो. प्रद्युम्न शाह सिंह और प्रो. अशोक कुमार जैन और डॉ. आनंद कुमार जैन समिति के सदस्य सचिव होंगे।
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भारत ज्ञान व्यवस्था के प्रचार को मिलेगा बल
कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने इस महत्वपूर्ण उपहार के लिए जैन एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स सपोर्ट का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों के शैक्षणिक व शोध कार्यों को सहयोग उपलब्ध कराने के लिए धनराशि जुटाने की बीएचयू की मुहिम के लिए यह समझौता व दानराशि अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रयास के तहत भारत की प्राचीन ज्ञान व्यवस्था को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा। दानकर्ताओं की ओर से शर्मिला जैन ओसवाल ने कहा कि इस प्रारंभिक दानराशि का उद्देश्य जैन अध्ययन का विस्तार करने हेतु काशी हिंदू विश्वविद्यालय को सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में विश्वविद्यालय में जैन दर्शन में अध्ययन व गतिविधियों को और आगे बढ़ाने के लिए दानकर्ताओं द्वारा एक पीठ की स्थापना की भी उम्मीद है।
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