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शिक्षा के साथ संस्कार का होना बहुत जरूरी : कलराज मिश्र
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बीएचयू स्थित अंतर विश्वविद्यालयीय अध्यापक शिक्षा केंद्र की ओर से आयोजित वेबिनार में विद्वानों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा विषय पर अपनी बात प्रमुखता से रखी। मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुविषयी शिक्षा, समग्र विकास का समावेश किया गया है। शिक्षा के साथ संस्कार का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना और कर्तव्यों का वाचन भी कराया और कहा कि भारत की सोच व्यापक रही है भारत ने विश्व गुरु का स्थान ज्ञान से ही प्राप्त किया है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि प्राचीन काल से ही हमारा देश उच्च मानवीय मूल्य और विशिष्ट वैज्ञानिक परंपराओं का देश रहा है और उद्देश के अनुरूप ही शिक्षा का स्वरूप और विषय निर्धारित किए जाते हैं। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने कहा कि प्राचीन भारत में दर्शन, भाषा विज्ञान, व्याकरण, खगोल विज्ञान सहित कई कल्याणकारी क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित कर मानव जाति की उन्नति में अधिक योगदान दिया है। अध्यक्षता बीएचयू अध्यापक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. बीके त्रिपाठी ने की। इस दौरान प्रो. आरपी शुक्ला, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. जीएन तिवारी, हरेराम पांडेय, अमरजीत सिंह, परोमिता चौबे, जय शंकर चौरसिया, विजय शंकर दुबे आदि मौजूद रहे।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि प्राचीन काल से ही हमारा देश उच्च मानवीय मूल्य और विशिष्ट वैज्ञानिक परंपराओं का देश रहा है और उद्देश के अनुरूप ही शिक्षा का स्वरूप और विषय निर्धारित किए जाते हैं। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने कहा कि प्राचीन भारत में दर्शन, भाषा विज्ञान, व्याकरण, खगोल विज्ञान सहित कई कल्याणकारी क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित कर मानव जाति की उन्नति में अधिक योगदान दिया है। अध्यक्षता बीएचयू अध्यापक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. बीके त्रिपाठी ने की। इस दौरान प्रो. आरपी शुक्ला, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. जीएन तिवारी, हरेराम पांडेय, अमरजीत सिंह, परोमिता चौबे, जय शंकर चौरसिया, विजय शंकर दुबे आदि मौजूद रहे।
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