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पढ़ाई ठप, संशय बरकरार, फैसले का इंतजार
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वाराणसी। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (एसवीडीवी) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। नियुक्ति के विरोध में छात्र 14 दिन से संकाय में तालाबंदी कर कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं ले सका है। वहीं संकाय में तालाबंदी से पढ़ाई ठप है। अब संकाय प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर संकाय खुलवाने में छात्रों से सहयोग मांगा है।
कुलपति प्रो. राकेश भटनागर के अब तक के कार्यकाल में हुईं नियुक्तियां विवादित नहीं रही हैं, लेकिन संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में हुई डॉ. फिरोज की नियुक्ति पर घमासान चल रहा है। पांच को साक्षात्कार के बाद छह को डॉ. फिरोज को नियुक्ति पत्र मिला। सात नवंबर को वह संकाय में पढ़ाने पहुंचे तो छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद डॉ. फिरोज को वापस लौटना पड़ा। सात नवंबर से ही संकाय में तालाबंद है। संकाय प्रमुख के साथ ही शिक्षक और कुछ छात्र हर दिन संकाय जा रहे हैं, लेकिन उन्हें बाहर ही रहना पड़ रहा है। बीएचयू कैंपस से निकला यह मुद्दा अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। लोग अपने-अपने तरीके से इस पर टिप्पणी कर रहे हैं। धरने पर बैठे छात्रों के साथ ही सभी को इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का इंतजार है।
जो भी बोलना है पीआरओ बोलेंगे : कुलसचिव
डॉ. फिरोज की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत का प्रयास कई दिनों से चल रहा है, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो रही है। बुधवार को जब कुल सचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी से बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाते ही प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी बोलना है, पीआरओ ही बोलेंगे। बेहतर होगा कि उन्हीं से बात की जाए।
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शिक्षकों से फीडबैक ले रहे डॉ. फिरोज
- बचाव में उतरे शिक्षक बोले, शिक्षा को धर्म से नहीं बांधा जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त के बाद जारी विरोध से डॉ. फिरोज खान सहमे हुए हैं। बीएचयू में इस प्रकरण को लेकर क्या-क्या हो रहा है? धरना खत्म हुआ या नहीं? विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कर रहा है? जैसे सवालों से वह विश्वविद्यालय के शिक्षकों से फीडबैक ले रहे हैं। उधर विश्वविद्यालय के शिक्षक फिरोज के बचाव में आ गए हैं। सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर) पर शिक्षक इस मामले में अपनी बात रख रहे हैं। बातचीत में इन शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा को धर्म के बंधन से नहीं बाधा जा सकता है।
धर्म के नाम पर शिक्षक को पढ़ाने से नहीं रोका जा सकता : प्रो. अहिरवार
बीएचयू के इतिहास विभाग के प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार का कहना है कि धर्म के नाम पर भला किसी शिक्षक को पढ़ाने से कैसे रोका जा सकता है। इसे लेकर विरोध प्रदर्शन देश की एकता, अखंडता, सामाजिक व धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले उनकी डॉ. फिरोज से बातचीत हुई थी। फिरोज ने इस पूरे मामले में सहयोग की बात कही थी। फिरोज ने नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना था कि उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई की और योग्यता के आधार पर नियुक्ति पाई, लेकिन अब हो रहे विरोध से वह दुखी हैं। डॉ. अहिरवार ने कहा कि संकाय में लगे जिस शिलापट्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें संस्कृत पढ़ने या पढ़ाने पर रोक जैसी कोई बात नहीं लिखी गई है।
भाषा को धर्म से जोड़कर देखना गलत : प्रो. आफताब
बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी कहते हैं कि बीएचयू प्रशासन ने जो भी किया, नियुक्ति के मामले में वह सही है। यह नई बात भी नहीं है। विश्वविद्यालय का मतलब ही यही है जहां हर जाति, धर्म के लिए समभाव हो। अगर कोई योग्य है तो नियुक्ति करना गलत नहीं है। अगर चयन समिति ने डॉ. फिरोज की योग्यता के अनुसार फैसला लिया है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। विभिन्न विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। कुछ ऐसे छात्र भी हैं जो उर्दू पढ़ा रहे हैं। बीएचयू में ही संस्कृत पढ़ने वाली एक मुस्लिम छात्रा को टॉपर होने पर दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक मेडल मिल चुके हैं। क्या ऐसे लोग संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं। किसी भाषा को धर्म से नहीं बाधा जा सकता है। मौलवी महेश प्रसाद ऐसे शिक्षक थे, जिन्होंने हिंदू होते हुए भी अरबी पढ़ाई। उनकी किताबों को भी लोग ‘कोट’ करते हैं। उर्दू विभाग में ही कई ऐसे छात्र हैं जो हिंदू हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। विरोध करने वाले छात्रों को इसे समझने की जरूरत है।
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न्याय न मिलने पर कोर्ट जाने का फैसला
- छात्र बोले- विरोध संस्कृत पढ़ाने का नहीं, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति का है
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर 14 दिन से कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है। बुधवार को शाम धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए छात्रों ने कहा कि विरोध डॉ. फिरोज खान का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन का कर रहे हैं। वह इसका भी विरोध नहीं कर रहे हैं कि डॉ. फिरोज संस्कृत पढ़ाएंगे। कला संकाय में संस्कृत भाषा पढ़ाने के लिए किसी भी शिक्षक की तैनाती विश्वविद्यालय प्रशासन करे, उस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मगर संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में इस तरह की नियुक्ति महामना के आदर्शों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति पर अगर पुनर्विचार नहीं किया तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस बीच बुधवार को भी दिन में छात्रों ने देवी भजनों की प्रस्तुति की।
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कुलपति प्रो. राकेश भटनागर के अब तक के कार्यकाल में हुईं नियुक्तियां विवादित नहीं रही हैं, लेकिन संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में हुई डॉ. फिरोज की नियुक्ति पर घमासान चल रहा है। पांच को साक्षात्कार के बाद छह को डॉ. फिरोज को नियुक्ति पत्र मिला। सात नवंबर को वह संकाय में पढ़ाने पहुंचे तो छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद डॉ. फिरोज को वापस लौटना पड़ा। सात नवंबर से ही संकाय में तालाबंद है। संकाय प्रमुख के साथ ही शिक्षक और कुछ छात्र हर दिन संकाय जा रहे हैं, लेकिन उन्हें बाहर ही रहना पड़ रहा है। बीएचयू कैंपस से निकला यह मुद्दा अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। लोग अपने-अपने तरीके से इस पर टिप्पणी कर रहे हैं। धरने पर बैठे छात्रों के साथ ही सभी को इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का इंतजार है।
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जो भी बोलना है पीआरओ बोलेंगे : कुलसचिव
डॉ. फिरोज की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत का प्रयास कई दिनों से चल रहा है, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो रही है। बुधवार को जब कुल सचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी से बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाते ही प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी बोलना है, पीआरओ ही बोलेंगे। बेहतर होगा कि उन्हीं से बात की जाए।
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शिक्षकों से फीडबैक ले रहे डॉ. फिरोज
- बचाव में उतरे शिक्षक बोले, शिक्षा को धर्म से नहीं बांधा जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त के बाद जारी विरोध से डॉ. फिरोज खान सहमे हुए हैं। बीएचयू में इस प्रकरण को लेकर क्या-क्या हो रहा है? धरना खत्म हुआ या नहीं? विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कर रहा है? जैसे सवालों से वह विश्वविद्यालय के शिक्षकों से फीडबैक ले रहे हैं। उधर विश्वविद्यालय के शिक्षक फिरोज के बचाव में आ गए हैं। सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर) पर शिक्षक इस मामले में अपनी बात रख रहे हैं। बातचीत में इन शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा को धर्म के बंधन से नहीं बाधा जा सकता है।
धर्म के नाम पर शिक्षक को पढ़ाने से नहीं रोका जा सकता : प्रो. अहिरवार
बीएचयू के इतिहास विभाग के प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार का कहना है कि धर्म के नाम पर भला किसी शिक्षक को पढ़ाने से कैसे रोका जा सकता है। इसे लेकर विरोध प्रदर्शन देश की एकता, अखंडता, सामाजिक व धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले उनकी डॉ. फिरोज से बातचीत हुई थी। फिरोज ने इस पूरे मामले में सहयोग की बात कही थी। फिरोज ने नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना था कि उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई की और योग्यता के आधार पर नियुक्ति पाई, लेकिन अब हो रहे विरोध से वह दुखी हैं। डॉ. अहिरवार ने कहा कि संकाय में लगे जिस शिलापट्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें संस्कृत पढ़ने या पढ़ाने पर रोक जैसी कोई बात नहीं लिखी गई है।
भाषा को धर्म से जोड़कर देखना गलत : प्रो. आफताब
बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी कहते हैं कि बीएचयू प्रशासन ने जो भी किया, नियुक्ति के मामले में वह सही है। यह नई बात भी नहीं है। विश्वविद्यालय का मतलब ही यही है जहां हर जाति, धर्म के लिए समभाव हो। अगर कोई योग्य है तो नियुक्ति करना गलत नहीं है। अगर चयन समिति ने डॉ. फिरोज की योग्यता के अनुसार फैसला लिया है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। विभिन्न विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। कुछ ऐसे छात्र भी हैं जो उर्दू पढ़ा रहे हैं। बीएचयू में ही संस्कृत पढ़ने वाली एक मुस्लिम छात्रा को टॉपर होने पर दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक मेडल मिल चुके हैं। क्या ऐसे लोग संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं। किसी भाषा को धर्म से नहीं बाधा जा सकता है। मौलवी महेश प्रसाद ऐसे शिक्षक थे, जिन्होंने हिंदू होते हुए भी अरबी पढ़ाई। उनकी किताबों को भी लोग ‘कोट’ करते हैं। उर्दू विभाग में ही कई ऐसे छात्र हैं जो हिंदू हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। विरोध करने वाले छात्रों को इसे समझने की जरूरत है।
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न्याय न मिलने पर कोर्ट जाने का फैसला
- छात्र बोले- विरोध संस्कृत पढ़ाने का नहीं, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति का है
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर 14 दिन से कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है। बुधवार को शाम धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए छात्रों ने कहा कि विरोध डॉ. फिरोज खान का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन का कर रहे हैं। वह इसका भी विरोध नहीं कर रहे हैं कि डॉ. फिरोज संस्कृत पढ़ाएंगे। कला संकाय में संस्कृत भाषा पढ़ाने के लिए किसी भी शिक्षक की तैनाती विश्वविद्यालय प्रशासन करे, उस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मगर संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में इस तरह की नियुक्ति महामना के आदर्शों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति पर अगर पुनर्विचार नहीं किया तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस बीच बुधवार को भी दिन में छात्रों ने देवी भजनों की प्रस्तुति की।