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अश्लील कमेंट करने वाले प्रोफेसर की बर्खास्तगी के लिए बीएचयू गेट पर दूसरे दिन भी धरना जारी

Sun, 15 Sep 2019 06:45 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 15 Sep 2019 06:45 AM IST
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BHU students on strike for dismissal of professor accused of molesting girl
बीएचयू गेट पर प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू में जंतु विज्ञान की छात्राओं पर अश्लील कमेंट करने के आरोप में निलंबित प्रोफेसर एसके चौबे को बर्खास्त करने की मांग करते हुए छात्राएं शनिवार शाम छह बजे से सिंह द्वार पर धरने पर बैठी हैं। धरना अभी भी जारी है। वहीं बीएचयू प्रशासन ने जेसी बोस हॉस्टल का गेट बंद करा दिया है।

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बीएचयू के कुलपति के आदेश पर छात्रावास का मेन गेट बंद करा दिया है। रविवार को बीएचयू के मेन गेट पर नारेबाजी करते हुए छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रोफेसर को बचाने का आरोप लगाया। चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय ने छात्राओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक वह कुलपति को बुलाने पर अड़ीं थीं। 
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धरने पर बैठी छात्राओं ने बताया कि पुणे टूर के दौरान प्रोफेसर चौबे ने छात्राओं की शारीरिक बनावट को लेकर अश्लील कमेंट करने के साथ अभद्रता भी की थी। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है, यह समझ से परे हैं। ऐसा तब हो रहा है जब धरना-प्रदर्शन करने के साथ ही लिखित शिकायत की गई थी। 
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उनका कहना है कि शैक्षणिक टूर का उद्देश्य नंद कानन जूलॉजिकल पार्क में जंतुओं के बारे में अध्ययन कराना था, लेकिन प्रो. चौबे छात्राओं को कोणार्क सूर्य मंदिर ले गए और वहां की प्रतिमाएं दिखाकर अश्लील कमेंट किए।

क्या है पूरा मामला

BHU students on strike for dismissal of professor accused of molesting girl
अश्लील कमेंट करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ धरने पर बैठीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

अक्तूबर 2018 में जूलॉजी विभाग की छात्राओं को शैक्षणिक टूर पर पुणे ले जाया गया था। टूर से आने के बाद छात्राओं ने प्रोफेसर चौबे पर अश्लील कमेंट का आरोप लगाते हुए शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से थी। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच चलने तक बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी। जांच समिति गठित कर 25 अक्तूबर 2018 से 30 नवंबर 2018 तक मामले की जांच कराई गई। 

कमेटी ने छात्राओं के साथ ही विभागीय शिक्षकों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी थी। रिपोर्ट में जांच समिति ने छात्राओं के आरोप को सही बताया था। जून 2019 को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को चेतावनी दी गई कि भविष्य में वह इस तरह के किसी भी टूर में नहीं जाएंगे। साथ ही भविष्य में उन्हें किसी तरह का कोई पद नहीं दिया जाएगा। 

छात्राओं की शिकायत के बाद प्रोफेसर को तुरंत निलंबित कर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारिणी परिषद ने भी उन पर मेजर पेनाल्टी लगाई है। उनकी सजा माफ नहीं हुई है। उन्हें सभी प्रकार के अधिकारों से डिबार कर दिया गया है। छात्राओं को कार्रवाई के बारे में समझना चाहिए। -प्रो. राकेश भटनागर, कुलपति 

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष 
बीएचयू पीआरओ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति अनुसार, प्रो. शैल कुमार चौबे पर जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सात जून 2019 को हुई कार्यकारिणी परिषद की बैठक में मेजर पेनाल्टी लगाई गई है। उन्हें अपराधी ठहराया गया है। उन्हें भविष्य में विश्वविद्यालय में कोई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व नहीं दिया जाएगा। न ही वे कभी छात्रों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा कभी किसी अन्य संस्थान में आवेदन भी नहीं कर पाएंगे। यदि वह आवेदन करना भी चाहेंगे तो वह स्वीकार नहीं होगा। उन पर लगाई गई पेनाल्टी उनके सर्विस रिकार्ड में भी डाल दी गई है।

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