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BHU: बीएचयू के छात्रों ने नोबल विजेताओं के संघर्षों को जाना, स्वतंत्रता भवन सभागार में हुआ व्याख्यान

Thu, 13 Nov 2025 05:58 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 13 Nov 2025 05:58 PM IST
सार

बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में बृहस्पतिवार को व्याख्यान शुरू हुआ। इसमें छात्रों ने नोबल विजेताओं के संघर्षों को जाना। व्याख्यान शृंखला के तहत चर्चा का विषय 2025 के साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के शैक्षणिक योगदानों पर आधारित रहा।

 

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BHU students learn about struggles of Nobel laureates in Varanasi
बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU - फोटो : X (@bhupro)

विस्तार

बीएचयू में बृहस्पतिवार को नोबेल पुरस्कार के 124 साल के इतिहास पर व्याख्यान शृंखला हुई। 1913 में गुरु रवींद्रनाथ टैगोर और 1930 में सीवी रमन से लेकर 2025 में शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वालीं मारिया कोरीना माचाडो की जीवनगाथा और उनके संघर्षों पर विमर्श हुआ। 

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स्वतंत्रता भवन में दोपहर 1:30 बजे से कला संकाय और सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से ये कार्यक्रम शुरू हुआ। इस तिथि का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि 1913 में इसी दिन रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी। टैगोर इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति थे। व्याख्यान शृंखला के तहत चर्चा का विषय 2025 के साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के शैक्षणिक योगदानों पर आधारित रहा।
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इस शृंखला में तीन व्याख्यान हुए। पहला व्याख्यान आईआईटी बॉम्बे के सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के प्रो. विनिश काथुरिया ने दिया। प्रौद्योगिकी प्रगति के माध्यम से सतत विकास की थीम पर अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से जोएल मोक्यर, फिलिप एजियन और पीटर हॉविट क्यों नवाजा गया प्रो. काथुरिया ने बताया। दूसरा व्याख्यान विश्वभारती विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन के प्रो. अमृत सेन ने दिया। वह ‘अजनबी को भाई बनाना : रवींद्र नाथ टैगोर, क्रांजनाहोरकाई और साहित्य के नोबेल पुरस्कार’ पर संवाद किए। तीसरा व्याख्यान जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रो. शिबाशीष चटर्जी ने दिया। वह ‘लोकतंत्र, असहमति और शांति: मारिया कोरीना माचाडो, पश्चिमी सिद्धांत और टैगोर का विश्वमानववाद’ विषय पर बात किए।

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