बीएचयू: शोधकर्ताओं को सिखाए नए तरीके और तकनीक, अनुसंधान उत्कृष्टता की ओर विषय पर कार्यशाला; जानें खास
Varanasi News: बीएचयू के सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रंथालय एवं एल्सेवियर के संयुक्त तत्वावधान से शोधकर्ताओं को नए तरीकों और तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही प्रभावी प्रकाशन के लिए आवश्यक कौशल देने के लिए कार्यशाला भी हुई।
विस्तार
BHU: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सयाजी राव गायकवाड़ केंद्रीय ग्रंथालय एवं एल्सेवियर के संयुक्त तत्वावधान में शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। 'एआई युग में प्रकाशन: सत्यनिष्ठा, कौशल और सामान्य कमियां' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों, प्रकाशन प्रक्रिया और नैतिक मानकों की जानकारी देना था।
कार्यशाला कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न संकायों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य फोकस रिसर्च इंटेग्रिटी, प्रकाशन नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, पांडुलिपि तैयार करने की प्रक्रिया तथा उच्च गुणवत्ता वाली शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन के लिए प्रभावी रणनीतियों पर रहा।
गंभीर मसलों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने हाल के वर्षों में अनुसंधान की गुणवत्ता में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, इसे और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि सभी विषयों के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए यह संस्थान एक उत्कृष्ट केंद्र बन सके। उन्होंने संकाय और विभाग स्तर पर शोध के नियमित मूल्यांकन की जरूरत पर भी बल दिया, जिससे गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन को बढ़ावा मिल सके।
दक्षिण एशिया से कस्टमर सक्सेस मैनेजर ऐश्वर्या नायल ने प्रतिभागियों को उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान मंचों और स्कोपस से जुड़े उपकरणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई के सही और जिम्मेदार उपयोग से शोध कार्य को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया जा सकता है।
नैतिक शोध पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक अपने सवाल रखे। विशेषज्ञों ने शोध से जुड़ी जटिलताओं, प्रकाशन की चुनौतियों और नैतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए समाधान प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जवाहर लाल ने किया। इस दौरान डॉ. राखी गुप्ता और प्रो. बिंदा डी परांजपे ने भी प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर देकर मार्गदर्शन किया। कार्यशाला ने शोधार्थियों को नई दिशा देने के साथ ही गुणवत्तापूर्ण और नैतिक शोध के महत्व को रेखांकित किया।