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BHU में बवाल के ये सभी हैं कसूरवार, सब बचा रहे अपनी अपनी गर्दन
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 01 Oct 2017 02:19 PM IST
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23 सितंबर की रात बीएचयू में हुआ था बवाल
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू परिसर में 23 सितंबर की रात समय पर सही निर्णय लिए गए होते तो माहौल अराजक नहीं होता। पुलिस रिकार्ड में दर्ज तथ्यों के अनुसार विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सिक्योरिटी गार्ड्स ने लाठीचार्ज कर पहले कानून का उल्लंघन किया और जब स्थिति अनियंत्रित प्रतीत हुई तो हाथ खड़े करते हुए पुलिस से मदद मांगी।
घटना को लेकर अहम सवाल यह हैं कि आखिरकार गार्ड्स को लाठीचार्ज का अधिकार कहां से मिला? उन्होंने किसके कहने पर लाठीचार्ज किया? और समय से प्रशासन से मदद क्यों नहीं मांगी गई?
दूसरी ओर पुलिस महकमे पर भी सवाल उठ रहे हैं कि बार-बार मांग करने के बावजूद परिसर में समय से फोर्स क्यों नहीं पहुंची? महिला महाविद्यालय के सामने आधी रात पुलिस ने किस अधिकारी के आदेश से छात्राओं पर लाठीचार्ज किया?
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23 सितंबर की रात 10:30 बजे तत्कालीन लंका थानाध्यक्ष राजीव सिंह बीएचयू गेट स्थित मालवीय प्रतिमा के समीप मौजूद थे। कहने को ही लाइन हाजिर किए गए एसआई राजीव सिंह के अनुसार इसी दौरान तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओएन सिंह का फोन आया कि छात्रों ने वीसी लॉज पर पथराव कर दिया है।
छात्रों पर लाठीचार्ज करना पड़ा है। स्थिति अनियंत्रित बताते हुए उन्होंने फोर्स के साथ जल्दी पहुंचने को कहा। वायरलेस सेट पर फोर्स की मांग करते हुए नरिया गेट से क्यूआरटी के साथ परिसर में घुसा गया तो छात्रों और गार्ड्स के बीच पथराव जारी था और स्ट्रीट लाइट बंद थीं।
वायरलेस सेट से फिर फोर्स की मांग की गई। इसी बीच 11:15 बजे एसपी सिटी फोर्स के साथ पहुंचे और रुइया चौराहा से छात्रों को खदेड़ना शुरू किया गया। इसके बाद फोर्स और टियर गैस गन मुहैया कराने के लिए एसपी सिटी ने भी वायरलेस सेट पर संदेश दिया।
सिटी कंट्रोल रूम से फोर्स के पहुंचने की बात कही जाती रही लेकिन बिड़ला हॉस्टल तक कोई पहुंच नहीं सका।
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घटना को लेकर अहम सवाल यह हैं कि आखिरकार गार्ड्स को लाठीचार्ज का अधिकार कहां से मिला? उन्होंने किसके कहने पर लाठीचार्ज किया? और समय से प्रशासन से मदद क्यों नहीं मांगी गई?
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दूसरी ओर पुलिस महकमे पर भी सवाल उठ रहे हैं कि बार-बार मांग करने के बावजूद परिसर में समय से फोर्स क्यों नहीं पहुंची? महिला महाविद्यालय के सामने आधी रात पुलिस ने किस अधिकारी के आदेश से छात्राओं पर लाठीचार्ज किया?
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23 सितंबर की रात 10:30 बजे तत्कालीन लंका थानाध्यक्ष राजीव सिंह बीएचयू गेट स्थित मालवीय प्रतिमा के समीप मौजूद थे। कहने को ही लाइन हाजिर किए गए एसआई राजीव सिंह के अनुसार इसी दौरान तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओएन सिंह का फोन आया कि छात्रों ने वीसी लॉज पर पथराव कर दिया है।
छात्रों पर लाठीचार्ज करना पड़ा है। स्थिति अनियंत्रित बताते हुए उन्होंने फोर्स के साथ जल्दी पहुंचने को कहा। वायरलेस सेट पर फोर्स की मांग करते हुए नरिया गेट से क्यूआरटी के साथ परिसर में घुसा गया तो छात्रों और गार्ड्स के बीच पथराव जारी था और स्ट्रीट लाइट बंद थीं।
वायरलेस सेट से फिर फोर्स की मांग की गई। इसी बीच 11:15 बजे एसपी सिटी फोर्स के साथ पहुंचे और रुइया चौराहा से छात्रों को खदेड़ना शुरू किया गया। इसके बाद फोर्स और टियर गैस गन मुहैया कराने के लिए एसपी सिटी ने भी वायरलेस सेट पर संदेश दिया।
सिटी कंट्रोल रूम से फोर्स के पहुंचने की बात कही जाती रही लेकिन बिड़ला हॉस्टल तक कोई पहुंच नहीं सका।
...और छात्राओं को दौड़ा दौड़ा कर लाठियों से पीटा
23 सितंबर की रात बीएचयू में हुआ था बवाल
- फोटो : अमर उजाला
इधर, बिड़ला चौराहा के समीप पुलिस और छात्रों के बीच पथराव, हवाई फायरिंग और बमबाजी जारी थी। उधर, डीएम और एसएसपी भारी-भरकम के साथ फोर्स के साथ 12 बजे के लगभग बीएचयू गेट पर पहुंचे।
रात 12:15 बजे के लगभग डीएम-एसएसपी फोर्स के साथ अंदर बढ़े तो बीएचयू गेट पर धरना दे रही छात्राओं को हटाया गया। इससे छात्राएं गुस्सा गईं और वे एमएमवी के सामने प्रदर्शन करने लगीं।
एमएमवी की वार्डेन असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड के अनुसार महिला पुलिस की गैरमौजूदगी में फोर्स ने उन्हें और छात्राओं को दौड़ा कर लाठियों से पीटा।
उधर, इसी दौरान लंका चौराहा पर उपद्रवियों ने पुलिस पिकेट में और तीन बाइक में आग लगा दी।
रात दो बजे के लगभग रुइया चौराहा से एलबीएस हॉस्टल के बीच का माहौल सामान्य हुआ तो फोर्स वापस लौटने लगी। रात दो बजे के लगभग मंडलायुक्त और आईजी रेंज बीएचयू पहुंचे और पैदल ही परिसर में घुसे।
एमएमवी के सामने छात्राओं पर पुलिस ने किसके आदेश से लाठीचार्ज किया? इस पर एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज ने कहा कि यह जांच का विषय है। न्यायिक जांच आयोग का गठन हो गया है। स्थिति जल्द स्पष्ट होगी।
रात 12:15 बजे के लगभग डीएम-एसएसपी फोर्स के साथ अंदर बढ़े तो बीएचयू गेट पर धरना दे रही छात्राओं को हटाया गया। इससे छात्राएं गुस्सा गईं और वे एमएमवी के सामने प्रदर्शन करने लगीं।
एमएमवी की वार्डेन असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड के अनुसार महिला पुलिस की गैरमौजूदगी में फोर्स ने उन्हें और छात्राओं को दौड़ा कर लाठियों से पीटा।
उधर, इसी दौरान लंका चौराहा पर उपद्रवियों ने पुलिस पिकेट में और तीन बाइक में आग लगा दी।
रात दो बजे के लगभग रुइया चौराहा से एलबीएस हॉस्टल के बीच का माहौल सामान्य हुआ तो फोर्स वापस लौटने लगी। रात दो बजे के लगभग मंडलायुक्त और आईजी रेंज बीएचयू पहुंचे और पैदल ही परिसर में घुसे।
एमएमवी के सामने छात्राओं पर पुलिस ने किसके आदेश से लाठीचार्ज किया? इस पर एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज ने कहा कि यह जांच का विषय है। न्यायिक जांच आयोग का गठन हो गया है। स्थिति जल्द स्पष्ट होगी।
कमिश्नर बोले- मैं तो लाठीचार्ज के बाद कैंपस पहुंचा था
23 सितंबर की रात बीएचयू में हुआ था बवाल
- फोटो : अमर उजाला
कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी भले ही कह रहे हों कि कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण 23 सितंबर की रात लाठीचार्ज के दौरान उनके आवास पर मौजूद थे। मगर, कमिश्नर ने इससे साफ इंकार किया है। उन्होंने बताया कि वह रात करीब दो बजे बीएचयू पहुंचे थे।
छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना रात साढ़े दस बजे के आसपास की है। तब तक कमिश्नर बीएचयू नहीं पहुंचे थे। दरअसल, पहले पूरे घटनाक्रम को हल्के में लेने के कारण पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने अपने वरिष्ठों को सूचना तक नहीं दी थी।
मंगलवार को दिल्ली में प्रो. त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि लाठीचार्ज के वक्त कमिश्नर उनके सरकारी आवास में मौजूद थे। अब कमिश्नर के इंकार करने से कुलपति के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लाजिमी हैं।
छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना रात साढ़े दस बजे के आसपास की है। तब तक कमिश्नर बीएचयू नहीं पहुंचे थे। दरअसल, पहले पूरे घटनाक्रम को हल्के में लेने के कारण पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने अपने वरिष्ठों को सूचना तक नहीं दी थी।
मंगलवार को दिल्ली में प्रो. त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि लाठीचार्ज के वक्त कमिश्नर उनके सरकारी आवास में मौजूद थे। अब कमिश्नर के इंकार करने से कुलपति के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लाजिमी हैं।