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मोदी-मैक्रों काशी दौराः पिछली बार का सबक, इस बार रहे सतर्क
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 13 Mar 2018 04:08 PM IST
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पीएम की फ्लीट गुजरने के मद्देनजर बंद कराया गया बीएचयू का मेन गेट
- फोटो : अमर उजाला
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पिछली बार बीएचयू गेट पर छात्राओं के धरने की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना रास्ता बदलना पड़ा था। तब धरना समाप्त करा पाने में नाकाम विश्वविद्यालय प्रशासन इस बार हर पहलुओं पर नजर रखे रहा, जिससे कि वही गलती दुबारा न हो और अतिथियों के दौरे में असुविधा हो।
इस बार दौरे के समय मेन गेट बंद कराने के साथ ही महिला महाविद्यालय का मुख्य द्वार भी करीब आधे घंटे तक बंद करा दिया गया, जिससे कि छात्राएं बाहर न आ सके। यहीं नहीं महाविद्यालय परिसर में अंदर छत पर चढ़ी छात्राओं को भी नीचे उतरवा दिया गया।
पिछले साल 21 सितंबर की शाम छात्रा संग छेड़खानी के बाद 22 सितंबर की सुबह से छात्राएं मुख्य द्वार पर धरने पर बैठी थी। इसी दिन 22 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बीएचयू गेट के रास्ते तुलसी मानस मंदिर और दुर्गा कुंड मंदिर जाना था।
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दिन भर धरना समाप्त कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। अंतत: शाम को सुरक्षा के लिहाज से पीएम का काफिला बीएचयू से पहले ही दूसरे रास्ते से ले जाया गया।
इसके बाद से पीएमओ, मानव संसाधन विकास मंत्रालय में भी विश्वविद्यालय प्रशासन की खूब किरकिरी हुई थी। तब छात्राएं कुलपति को धरना स्थल पर बुलाती रहीं लेकिन वह गए नहीं। इस बार पीएम नरेंद्र मोदी को फिर इधर से ही गुजरना था, इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन सकते में रहा।
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इस बार दौरे के समय मेन गेट बंद कराने के साथ ही महिला महाविद्यालय का मुख्य द्वार भी करीब आधे घंटे तक बंद करा दिया गया, जिससे कि छात्राएं बाहर न आ सके। यहीं नहीं महाविद्यालय परिसर में अंदर छत पर चढ़ी छात्राओं को भी नीचे उतरवा दिया गया।
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पिछले साल 21 सितंबर की शाम छात्रा संग छेड़खानी के बाद 22 सितंबर की सुबह से छात्राएं मुख्य द्वार पर धरने पर बैठी थी। इसी दिन 22 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बीएचयू गेट के रास्ते तुलसी मानस मंदिर और दुर्गा कुंड मंदिर जाना था।
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दिन भर धरना समाप्त कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। अंतत: शाम को सुरक्षा के लिहाज से पीएम का काफिला बीएचयू से पहले ही दूसरे रास्ते से ले जाया गया।
इसके बाद से पीएमओ, मानव संसाधन विकास मंत्रालय में भी विश्वविद्यालय प्रशासन की खूब किरकिरी हुई थी। तब छात्राएं कुलपति को धरना स्थल पर बुलाती रहीं लेकिन वह गए नहीं। इस बार पीएम नरेंद्र मोदी को फिर इधर से ही गुजरना था, इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन सकते में रहा।
इस बार ये बरती सावधानी
बीएचयू
मेन गेट के सामने से मोदी-मैक्रों का काफिला दोपहर ढाई बजे गुजरा लेकिन पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इस बार विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति और कुल सचिव नीरज त्रिपाठी अधिकारियों संग दोपहर बारह बजे से ही बैठे रहे और बाहर भी चीफ प्राक्टर अपनी टीम के साथ रही।
बाहर छात्राएं न आ पाए इसके लिए महिला महाविद्यालय का गेट बंद करा दिया गया। इसके अलावा छत पर खड़ी छात्राओं की तरफ जैसे ही प्राक्टोरियल बोर्ड की नजर गई, अंदर पहुंचकर महिला गार्डों ने छात्राओं को नीचे उतरवाया।
महिला महाविद्यालय से मेन गेट पर मुंह बांधकर जाने वाली छात्राओं से मुंह पर बंधा कपड़ा खोलवाया गया। वहीं काले रंग का ड्रेस पहनकर महाविद्यालय-गेट की तरफ जा रही छात्राओं को वापस किया गया।
बाहर स्वागत में खड़े विश्वविद्यालय सुरक्षाकर्मियों, प्राक्टोरियल बोर्ड सदस्य महाविद्यालय छतों पर खड़ी छात्राओं की गतिविधि पर नजर रखे रहे। इसके साथ ही कार्यवाहक कुलपति भी हर गतिविधियों का पल-पल जायजा लेते रहे।
बाहर छात्राएं न आ पाए इसके लिए महिला महाविद्यालय का गेट बंद करा दिया गया। इसके अलावा छत पर खड़ी छात्राओं की तरफ जैसे ही प्राक्टोरियल बोर्ड की नजर गई, अंदर पहुंचकर महिला गार्डों ने छात्राओं को नीचे उतरवाया।
महिला महाविद्यालय से मेन गेट पर मुंह बांधकर जाने वाली छात्राओं से मुंह पर बंधा कपड़ा खोलवाया गया। वहीं काले रंग का ड्रेस पहनकर महाविद्यालय-गेट की तरफ जा रही छात्राओं को वापस किया गया।
बाहर स्वागत में खड़े विश्वविद्यालय सुरक्षाकर्मियों, प्राक्टोरियल बोर्ड सदस्य महाविद्यालय छतों पर खड़ी छात्राओं की गतिविधि पर नजर रखे रहे। इसके साथ ही कार्यवाहक कुलपति भी हर गतिविधियों का पल-पल जायजा लेते रहे।