सेवा शर्त की अनदेखी के विरोध में धरने पर बैठीं बीएचयू की महिला शिक्षक, लगाया आरोप
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बीएचयू पत्रकारिता विभाग में कार्यरत शिक्षक डॉ. शोभना नर्लिकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सेवा शर्तों की अनदेखी कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। 2013 में (31 जनवरी से 12 फरवरी 2014) पूरी सेवा देने के बाद भी सेवा पुस्तिका में इसका जिक्र न होने के विरोध में केंद्रीय कार्यालय में धरना देकर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने बताया कि जान बूझकर कर 13 दिन तक लीव विदाउट पे (एलडब्ल्यूपी) दिखाया गया है। इस वजह से उनका प्रमोशन भी नहीं हो पा रहा है। कई बार केंद्रीय कार्यालय का चक्कर लगाने, पत्र देने के बाद भी न तो कुलपति सुन रहे हैं और न ही कुलसचिव की ओर से कोई कार्रवाई की गई। सोमवार को जब इस मांग को लेकर केंद्रीय कार्यालय गईं तो वहां भी कर्मचारी ने कोई सुनवाई नहीं की।
डॉ. शोभना ने सोमवार को पहले केंद्रीय कार्यालय में अंदर धरना दिया बाद में चैनल गेट के बाहर आकर धरने पर बैठ गई। उधर सूचना पाकर मौके पर पहुंचकर चीफ प्रॉक्टर प्रो. आनंद चौधरी ने भी बातचीत की, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
बीएचयू पीआरओ डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में बीएचयू अधिनियम और सरकार के नियमों के तहत ही शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्रों के हितों को देखा जाता है। महिला शिक्षिक का क्या मामला है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।