{"_id":"babd130a7ca3c0b410bbce4a0b296616","slug":"bhu-jnu-flame-arrived-clashes-on-pylon-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू पहुंची जेएनयू की आंच, सिंहद्वार पर झड़प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू पहुंची जेएनयू की आंच, सिंहद्वार पर झड़प
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
Updated Fri, 19 Feb 2016 02:03 AM IST
विज्ञापन
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी से उपजा विवाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) तक आ पहुंचा है।
विज्ञापन
जेएनयू मामले में गिरफ्तार छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन और विरोध में कई छात्र संगठन गुरुवार को आमने-सामने आ गए।
माहौल तब गरमाया जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और आइसा के छात्र नेता जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रनेताओं ने इसका विरोध किया।
फिर दोनों ओर से जमकर झड़प, नारेबाजी और हाथापाई हुई। हालात संभालने के लिए पुलिस ने मौके पर मौजूद 39 लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। जो बाद में रिहा हो गए।
विज्ञापन
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन में आइसा, एनएसयूआई सहित कई अन्य छात्र संगठनों के छात्रनेता और कार्यकर्ता बीएचयू के सिंहद्वार पर जुटे। फिर वे जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के समर्थन में यहीं धरने पर बैठ गए।
विज्ञापन
इसी बीच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ कार्यकर्ता भी यहां पहुंच गए और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। कन्हैया कुमार के समर्थन में नारेबाजी से माहौल और तल्ख हुआ।
बात इतनी बढ़ गई कि आमने-सामने हुए छात्र संगठनों में हाथापाई होने लगी। आइसा ने आरोप लगाया है कि घटना के दौरान छात्र नेता कुमार मंगलम को दूसरे छात्र संगठनों के छात्रों ने पीटा और कपड़े फाड़ दिए।
इस बीच, एनएसयूआई और युवक कांग्रेस के धरनारत छात्रों ने सिंह द्वार के समीप भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का पुतला फूंकने की कोशिश की। तब तक बड़ी तादाद में मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स ने हंगामा करने और पुतला फूंकने का प्रयास करने वाले सभी छात्रों को गिरफ्तार कर लिया और बस में भरकर पुलिस लाइन भेज दिया।
पुलिस ने कुल 39 छात्रनेताओं को गिरफ्तार किया। सीओ कैंट राजकुमार यादव ने बताया कि आईसा के 28 और कांग्रेस के 11 छात्रनेताओं को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।