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गंगाजल खत्म करेगा कोरोना, बीएचयू आईएमएस को दिखी उम्मीद: गंगा किनारे वालों के रिपोर्ट आई निगेटिव

Thu, 17 Sep 2020 10:58 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 17 Sep 2020 10:58 AM IST
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BHU IMS taking samples of people living banks of ganga report came corona negative seen hope covid ends by gangajal
गंगा किनारे के लोगों को लिया गया सैंपल। - फोटो : अमर उजाला

वैश्विक महामारी कोरोना को गंगाजल से हराने का दावा हकीकत में बदल सकता है। वाराणसी में बीएचयू आईएमएस की टीम ने गंगाघाट के किनारे रहने वाले चार सौ लोगों की सैंपलिंग की तैयारी की है। पहले दिन 54 लोगों की सैंपलिंग हुई और सभी के सभी निगेटिव मिले। इस परिणाम से बैक्टीरियोफॉज से नोजल स्प्रे बनाने वाली मेडिकल टीम भी उत्साहित है। 

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बुधवार को तुलसीघाट, भदैनी, चेतसिंह घाट, हरिश्चंद्र घाट पर बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा की अगुवाई में डाक्टरों की टीम ने कोरोना की सैंपलिंग शुरू की। इस दौरान घाट पर रहने वाले नियमित गंगा स्नान व आचमन करने वाले पंडा, पुजारी, डोम, मल्लाह और साधुओं की सैंपलिंग हुई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव मिली है। सैंपलिंग का काम अभी सप्ताह भर तक चलेगा। टीम राजघाट तक लोगों की सैंपलिंग करेगी।
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बता दें कि बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में हुए रिसर्च से पता चला है कि गंगाजल में खासी तादात में मौजूद बैक्टीरियोफॉज कोरोना को परास्त करने की क्षमता रखते हैं। गंगाजल से कोरोना के इलाज के ह्यूमन ट्रायल की तैयारी के बीच इस रिसर्च को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ माइक्रोबायोलॉजी के आगामी अंक में जगह मिल गई है। 

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गंगाजल के बैक्टीरियोफाज का स्प्रे, बीएचयू। - फोटो : अमर उजाला

नियमित गंगा स्नान वालों पर है वायरस का कम असर 
बीएचयू केन्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामेश्वर चौरसिया, न्यूरोलाजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा की अगुवाई में टीम ने प्रारंभिक सर्वे में पाया है कि नियमित गंगा स्नान और गंगाजल का किसी न किसी रूप में सेवन करने वालों पर कोरोना संक्रमण का तनिक भी असर नहीं है। टीम का दावा है कि स्नान करने वाले 90 फीसदी लोग कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं। इसी तरह गंगा किनारे के 42 जिलों में कोरोना का संक्रमण बाकी शहरों की तुलना में 50 फीसदी से कम और संक्रमण के बाद जल्दी ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा है। 

एथिकल कमिटी को भेजा बायरोफेज  
रिसर्च टीम के लीडर प्रो. वीएन मिश्र ने बताया कि स्टडी के साथ ही गोमुख से लेकर गंगा सागर तक सौ स्थानों पर सैंपलिंग हुई। इसके अलावा कोरोना मरीजों की फेजथेरेपी के लिए गंगाजल का नेजल स्प्रे भी तैयार कराया गया है। इस पूरी कवायद की डिटेल रिपोर्ट आईएमएस की एथिकल कमिटी को भेज दी गई है। प्रो. वी. भट्टाचार्या के चेयरमैनशिप वाली 12 सदस्यीय एथिकल कमिटी की मंजूरी के बाद कोरोना मरीजों पर फेजथेरेपी का ट्रायल शुरू होगा।

गंगनानी के जल से होगा ट्रायल 
गंगोत्री से करीब 35 किलोमीटर नीचे गंगनानी में मिलने वाले गंगाजल का ह्यूमन ट्रायल में प्रयोग किया जाएगा। सहमति के आधार पर 250 लोगों पर ट्रायल होगा। इसमें से आधे लोगों को दवा से छेड़छाड़ किए बिना एक पखवारे तक नाक में डालने के लिए गंगनानी से लाया गया गंगाजल और बाकी को प्लेन वॉटर दिया जाएगा। इसके बाद परिणाम का अध्ययन कर रिपोर्ट इंडियन काउंसिल ऑफ  मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर को भेजी जाएगी।

रिसर्च में आईआईटीआर भी शामिल 
बैक्टीरियोफॉज से कोरोना के इलाज पर रिसर्च करने वाली टीम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च आईआईटीआर लखनऊ के विज्ञानी डॉ. रजनीश चतुर्वेदी को भी शामिल किया गया है। टीम के सदस्यों में बीएचयू के डॉ. अभिषेक, डॉ. वरुण सिंह,  डॉ. आनंद कुमार व रिसर्च स्कॉलर निधि तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के एमिकस क्यूरी एडवोकेट अरुण गुप्ता हैं।

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