बीएचयू अस्पताल: एमसीएच विंग में ओपीडी शुरू, पहले ही दिन उमड़ी भीड़, नहीं दिखा कोविड प्रोटोकॉल
बीएचयू एमएस ऑफिस के बगल में बने एमसीएच विंग में ओपीडी सोमवार को शुरू हुई। एमएस प्रोफेसर केके गुप्ता ने बताया कि जल्द ही यहां भर्ती, ऑपरेशन, जांच सहित अन्य सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी।
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बीएचयू अस्पताल स्थित एमसीएच विंग में सोमवार से ओपीडी शुरू हो गई। पहले दिन यहां महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। ओपीडी हॉल में जिस तरह महिलाएं एक दूसरे के पास खड़ी रही, उससे सामाजिक दूरी का पालन भी होता नहीं दिखा। ऐसा नहीं है कि यहां देखरेख के लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती नहीं थी लेकिन उनकी नजर भी इस पर नहीं पड़ी। इधर पहले दिन 50 से अधिक महिलाएं देखी गई।
एमएस ऑफिस के बगल में बने पांच मंजिला एमसीएच विंग में नवजात बच्चों के जांच, इलाज और भर्ती की सुविधा है। 100 बेड वाले विंग के भूतल पर ओपीडी सोमवार को शुरू हुई। वाराणसी और आसपास के जिलों से पहुंची महिलाओं ने पहले सुबह पंजीकरण कराया, इसके बाद चिकित्सकों को दिखाया।
इस दौरान स्त्री रोग विभाग की चिकित्सक मेजर डॉ. अंजली रानी ने महिलाओं को परामर्श देने के साथ ही सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी। इस दौरान महिलाओं को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते रहने के लिए प्रेरित किया गया। बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रोफेसर केके गुप्ता ने बताया कि जल्द ही यहां भर्ती, ऑपरेशन, जांच सहित अन्य सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी। इसके बाद दूरदराज से आने वाली महिलाओं को लाभ मिलेगा। तब तक पुरानी जगह पर ही ऑपरेशन होंगे।
एमसीएच विंग में नवजात बच्चों के लिए भी मंगलवार से हाई रिस्क क्लीनिक यानी ओपीडी की शुरुआत होगी। एमएस ने बताया कि चिकित्सकों की तैनाती सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। फिलहाल यहां गंभीर बच्चों को देखा जाएगा। मंगलवार के अलावा शुक्रवार को भी यह क्लीनिक चलेगी।
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चिल्ड्रेन वार्डों में बेड खाली होने का इंतजार
वाराणसी जिले के अस्पतालों के चिल्ड्रेन वार्डों में दिन प्रतिदिन बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि मंडलीय अस्पताल, बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड अब भी बच्चों से भरे पड़े हैं। यहां बच्चों के परिजन बेड खाली होने का इंतजार कर रहे हैं।
सोमवार को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में 20 बेड वाले चिल्ड्रेन वार्ड में भी 10 से अधिक बच्चे डायरिया से ग्रसित हैं। उधर बीएचयू अस्पताल में भी डायरिया के साथ-साथ ही सांस लेने में तकलीफ, सर्दी, खांसी और बुखार से परेशान बच्चों का इलाज चल रहा है। हालत यह है कि अस्पताल के एनआईसीयू में भी 20 से अधिक बच्चे भर्ती है।