बीएचयू: बीए के कोर्स से रामायण और महाभारत का अध्याय हटाने वाली बात महज एक अफवाह- पीआरओ
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में माहौल अभी काफी गरमाया हुआ है। एक ओर छात्रों का संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान का विरोध खत्म नहीं हो रहा है, वहीं कैंपस में सोमवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग में वीर सावरकर की तस्वीर को उतारकर फेंकने का मामला सामने आने से गरमा गया था। अब एक बार फिर से बीएचयू चर्चा में है।
बीएचयू के इतिहास विभाग ने बीए के कोर्स से रामायण और महाभारत के साथ वैदिक काल का अध्याय हटाने का मैसेज छात्रों के बीच तेजी से वायरल हो रहा है। इससे छात्रों में खासा आक्रोश है। वहीं जानकारी के मुताबिक छात्रों ने इसको लेकर विभागाध्यक्ष से आपत्ति जताई है।
पीआरओ राजेश सिंह ने इसे गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता है। कोर्स के बारे में कोई भी निर्णय एकेडमिक काउंसिल लेती है। विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए साजिश रची जा रही है।
इससे पहले बीएचयू कैंपस में सोमवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग में वीर सावरकर की तस्वीर को उतारकर फेंकने की शिकायत छात्रों ने विभागाध्यक्ष से करते हुए मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। घटना सोमवार सुबह की है। एमए प्रथम वर्ष का एक छात्र पहुंचा तो देखा कि वहां तस्वीर फेंकी पड़ी है। बाद में इसे कमरे में लगा दिया गया। मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।
समाज विज्ञान के संकाय प्रोफेसर आरपी पाठक ने बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यी टीम घोषित की गई है। इसमें बिंदा पराजंपे (इतिहास), प्रो जेबी कुमरईया (अर्थशास्त्र) और विधि संकाय से डा वीके सिंह है। वहीं छात्रों का आक्रोस कम नहीं हो रहा है, उनकी मांग है कि इसकी जांच जल्दी से जल्दी की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।