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BHU में गोडसे पर नाटक को लेकर विवाद, जांच कमेटी ने यूजीसी को भेजी यह रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 18 Mar 2018 09:18 PM IST
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में आयोजित युवा महोत्सव संस्कृति के दौरान मराठी नाटक मी नाथु राम गोडसे बोलताय के हिंदी संस्करण मंचन को लेकर शुरू विवाद अब थमता नजर आ रहा है।
मामले में छात्रों की शिकायत पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर बनी जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी है। रिपोर्ट में इस नाटक को विश्वविद्यालय के मुख्य युवा महोत्सव स्पंदन से पहले संकाय स्तर पर आयोजित महोत्सव में स्क्रीनिंग के दौरान ही बाहर करने का जिक्र है।
विश्वविद्यालय में अंतर संकाय युवा महोत्सव स्पंदन से पहले संकाय स्तर पर होने वाले आयोजनों के माध्यम से ही उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को मुख्य आयोजन में भाग लेने का मौका मिलता है।
कला संकाय के तीन दिवसीय युवा महोत्सव 19 से 21 फरवरी के दूसरे दिन कला संकाय सभागार में मराठी नाटक का मंचन हुआ था। इस पर आपत्ति जताते हुए छात्रों ने न केवल कला संकाय प्रमुख से शिकायत की बल्कि लंका थाने में तहरीर देकर इसे राष्ट्रपिता का अपमान बताया था।
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मामले में छात्रों की शिकायत पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर बनी जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट यूजीसी को भेज दी है। रिपोर्ट में इस नाटक को विश्वविद्यालय के मुख्य युवा महोत्सव स्पंदन से पहले संकाय स्तर पर आयोजित महोत्सव में स्क्रीनिंग के दौरान ही बाहर करने का जिक्र है।
विश्वविद्यालय में अंतर संकाय युवा महोत्सव स्पंदन से पहले संकाय स्तर पर होने वाले आयोजनों के माध्यम से ही उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को मुख्य आयोजन में भाग लेने का मौका मिलता है।
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कला संकाय के तीन दिवसीय युवा महोत्सव 19 से 21 फरवरी के दूसरे दिन कला संकाय सभागार में मराठी नाटक का मंचन हुआ था। इस पर आपत्ति जताते हुए छात्रों ने न केवल कला संकाय प्रमुख से शिकायत की बल्कि लंका थाने में तहरीर देकर इसे राष्ट्रपिता का अपमान बताया था।
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नाटक के बाद हुआ था जमकर विरोध
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यह भी कहा था कि इसके माध्यम से महात्मा गांधी की हत्या को सही ठहराने के साथ ही उनके हत्यारे गोडसे का महिमा मंडन किया गया। इधर, विरोध के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर कला संकाय प्रमुख के निर्देशन में गठित जांच कमेटी ने जांच की।
अब जो रिपोर्ट कुलसचिव के माध्यम से यूजीसी को भेजी गई है, उसमें यह बताया गया है कि आयोजन समिति ने संकाय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान ही इसे स्पंदन के लिए अस्वीकृत कर दिया था।
साथ ही, यह भी लिखा गया है कि विश्वविद्यालय में होने वाले महोत्सव में कोई भी ऐसा नाटक, कार्यक्रम नहीं दिखाया जाता है कि जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सांप्रदायिकता, राजनीतिक विषयों को शामिल किया जाए।
अब जो रिपोर्ट कुलसचिव के माध्यम से यूजीसी को भेजी गई है, उसमें यह बताया गया है कि आयोजन समिति ने संकाय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान ही इसे स्पंदन के लिए अस्वीकृत कर दिया था।
साथ ही, यह भी लिखा गया है कि विश्वविद्यालय में होने वाले महोत्सव में कोई भी ऐसा नाटक, कार्यक्रम नहीं दिखाया जाता है कि जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सांप्रदायिकता, राजनीतिक विषयों को शामिल किया जाए।