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संगीत में रस और भाव की अहम भूमिका
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वाराणसी। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय में चल रहे ऑनलाइन व्याख्यानमाला के चौथे दिन वक्ताओं ने संगीत की अलग-अलग विधाओं से जुड़ी बारीकियां प्रतिभागियों को बताईं। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ मंच कला विभाग की अध्यक्ष डॉ. संगीता घोष ने कहा कि संगीत और रस में भाव की अवधारणा की अहम भूमिका हैं। प्रतिभागियों को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
दूसरे सत्र में डॉ. संजय वर्मा ने तंत्र वाद्यों पर बीनकारी और तंत्रकारी विषय पर प्रकाश डाला। भातखंडे संगीत संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्रा ने ताल पक्ष में गणित के प्रयोग के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों, छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान डॉ. ज्ञानेश पांडेय, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया साह, संगीता सिंह, डॉ. मनीष करवड़े, अंजली शर्मा आदि रहे।
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दूसरे सत्र में डॉ. संजय वर्मा ने तंत्र वाद्यों पर बीनकारी और तंत्रकारी विषय पर प्रकाश डाला। भातखंडे संगीत संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्रा ने ताल पक्ष में गणित के प्रयोग के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों, छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान डॉ. ज्ञानेश पांडेय, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया साह, संगीता सिंह, डॉ. मनीष करवड़े, अंजली शर्मा आदि रहे।
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