बीएचयू : 59 वैज्ञानिकों के लिए एससी-एसटी दिव्यांग, महिलाओं के आवेदन मुफ्त; अन्य को 500-1000 रुपये
Varanasi News: नॉन टीचिंग पदों पर 500 रुपये दिए जाने हैं। ये धनराशि वापस नहीं होगी। धनराशि ऑनलाइन मोड में यूपीआई, नेट बैंकिंग या क्यू आर कोड के माध्यम से करना होगा।
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10वीं से लेकर पीएचडी तक की योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए 18 हजार से लेकर सवा दो लाख के वेतन तक 59 वैज्ञानिक, शिक्षक और नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्तियां होंगी। इसमें एससी और एसटी के नौ, ओबीसी के 13 और ईडब्ल्यूएस के पांच पद भी शामिल हैं। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस को 500 से 1000 रुपये आवेदन के लिए देने होंगे जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों के लिए आवेदन मुफ्त है।
बीएचयू के इन 59 पदों पर समर्थ और सीयू पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन होगा। बरकछा स्थित दक्षिणी परिसर में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में भारत सरकार के मानक नियमों के अनुसार इन अस्थायी पदों पर भर्तियां होंगी। वैज्ञानिक, तकनीकी और केवीके पदों पर आवेदन के लिए सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को 1000 रुपये देने होंगे।
विज्ञान की इन शाखाओं में पढ़ाई जरूरी : कृषि विज्ञान, गृह विज्ञान, मत्स्य पालन, जंतु विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान की किसी भी शाखा में डॉक्टरेट की उपाधि हो और साथ ही वैज्ञानिक, व्याख्याता या विशेषज्ञ के रूप में कम से कम 8 वर्ष का अनुभव भी हो। वहीं, कृषि इंजीनियरिंग में पीएचडी धारकों या स्नातकोत्तर के लिए छह साल का अनुभव मांगा गया है।
10वीं से पीएचडी तक की हो योग्यता
वरिष्ठ वैज्ञानिक की भर्ती के लिए पीएचडी तो फील्ड मैन के लिए हाईस्कूल पास होना चाहिए। वहीं, सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट, जूनियर साइंटिस्ट पद के लिए बीटेक या एमएससी की योग्यता मांगी गई है। क्लर्क के लिए कृषि से सामान्य स्नातक और टेक्निकल स्टाफ के लिए बीएससी की अर्हता होनी चाहिए।
काशी विद्यापीठ में एआई आधारित प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की त्रैमासिक बैठक में शैक्षणिक एवं शोध की गुणवत्ता से संबंधित कई निर्णय लिए गए। कुलपति प्रो. एके त्यागी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने पर मंथन हुआ। इसमें रिसर्च मेथडोलॉजी के पाठ्यक्रम में एआई टूल्स को शामिल करने पर सहमति बनी।
बैठक में जेपी विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति और आइक्यूएसी सदस्य प्रोफेसर हरिकेश सिंह के सुझाव के बाद यह निर्णय लिया गया कि एआई की सहायता से विवि के अध्यापकों की निपुणता के आधार पर अतिरिक्त प्रशिक्षण आवश्यक है। इसका निर्धारण किया जाना चाहिए। आईक्यूएसी सदस्य एवं पूर्व नैक निदेशक प्रो. एनराय ने विचार रखे। प्रो. सुरेंद्र सिंह, प्रो. नंदिनी सिंह,नीरज पारिख रहे।