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द्वादश ज्योर्तिलिंग में सबसे पहले प्रकट हुए थे भीमेश्वर महादेव, दर्शन से नष्ट होते हैं सभी पाप
Mon, 09 Aug 2021 01:25 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Mon, 09 Aug 2021 01:25 PM IST
सार
काशी खंड के अनुसार भीमेश्वर लिंग का दर्शन करने से व्यक्ति के सभी पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। सेवा पूजन करने से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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ज्योतिर्लिंग
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विस्तार
द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन का पुण्य लाभ काशी में भी कमाया जा सकता है। काशी खंड के द्वापर काल में काशी में द्वादश ज्योर्तिलिंग का उद्भव हुआ था। काशी करवत मंदिर में भीमेश्वर ज्योर्तिलिंग स्थित हैं। विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के बगल में ही काशी करवत का मंदिर स्थित है। मंदिर में त्रिकाल सेवा का विधान है। यह मंदिर द्वापर काल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पूर्व का है।
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काशी खंड के अनुसार भीमेश्वर लिंग का दर्शन करने से व्यक्ति के सभी पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। सेवा पूजन करने से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महंत पं. दिनेश शंकर उपाध्याय ने बताया कि स्कंदपुराण की कथा के अनुसार राजा दिवोदास के मोक्ष प्राप्ति के बाद भगवान शंकर पुन: काशी आगमन पर हुए उत्सव में पधारे द्वादश ज्योर्तिलिंग काशी में ही विराजमान हो गए।
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इनमें से भगवान भीमेश्वर सप्त गोदावरी तीर्थ से पधारकर भक्तों को भोग के पश्चात मोक्ष प्रदान करने के लिए प्रकाशमान हुए। इनके दर्शन मात्र से ही मनुष्यों के महाभयंकर पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों में वर्णित सात मोक्ष पुरियों में काशी की प्रधानता के कारण लोग मोक्ष के लिए काशी में ही देहत्याग करते थे।
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भीमेश्वर के निकट ही करवत से सिरच्छेद कर मोक्ष की प्राप्ति करते थे। करवत शब्द संस्कृत के क्रकच अथवा करपत्र का अपभ्रंश है। इसका अर्थ होता है आरा। कालांतर में यह प्रथा समाप्त हो गई। श्रावण मास में प्रतिदिन शाम को शृंगार एवं रुद्राभिषेक होता है। पूर्णिमा को विशेष शृंगार व रुद्राभिषेक होता है। मंदिर का वर्तमान निर्माण लगभग सौ साल पूर्व मंदिर के महंत स्व. पंडित किशोरी लाल उपाध्याय ने कराया था।